
स्वयंसेवकों ने किया सीता स्वयंवर एवं धनुष भंग का मंचन
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा अक्षय तृतीया के अवसर पर प्रत्येक वर्ष की भाँति महर्षि परशुराम जयंती का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. शान्तनु रस्तोगी की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में महर्षि परशुराम के चित्र पर पुष्पार्चन कर उनके विचारों पर प्रकाश डाला गया। कुलसचिव प्रो. शान्तनु रस्तोगी ने कहा कि महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिये। त्याग, तपस्या और अपने कर्म के आधार पर ही कोई महापुरुष के रूप में याद किया जाता है।
एनएसएस समन्वयक डॉ. ओमप्रकाश सिंह ने सभी उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी एवं डॉ. अखिल मिश्र ने भी संबोधित किया और महर्षि परशुराम को सामाजिक एवं सांस्कृतिक समन्वय का प्रतीक एवं राम परंपरा का बताया। उनमें शस्त्र एवं शास्त्र दोनों पर समान अधिकार था।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीष पाण्डेय ने किया।
इस दौरान प्रो. उमेश नाथ त्रिपाठी, प्रो. जितेंद्र मिश्रा, प्रो. अजय शुक्ला, प्रो. शरद मिश्रा, प्रो. प्रत्युष दूबे, डॉ अमित उपाध्याय, डॉ कुसुम रावत, डॉ प्रभुनाथ प्रसाद, डॉ कुलदीपक शुक्ल, डॉ. रमेश कुमार, डॉ. कमलेश यादव, डॉ. संजय तिवारी, डॉ. सुनील यादव, डॉ. वंदना सिंह, डॉ. राजलक्ष्मी, डॉ. हर्ष देव वर्मा समेत एनएसएस के सभी कर्मचारी एवं स्वयं सेवकों की उपस्थिति रही।
स्वयंसेवकों ने किया सीता स्वयंवर एवं शिवधनुष भंग का मंचन
एनएसएस स्वयंसेवकों ने परशुराम जयंती के अवसर पर शिव धनुष भंग और सीता माता के स्वयंवर की नाट्यप्रस्तुति किया। इस दौरान भगवान श्री राम द्वारा धनुष भंग कर माता सीता के गले में वरमाला डाला गया और परशुराम एवं राम का संवाद हुआ। कुलसचिव समेत उपस्थित अतिथियों ने बच्चों के अभिनय की भूरी भूरी प्रशंसा की।
