राष्ट्र की परम्परा, लखनऊ।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री के आधिकारिक ईमेल आईडी पर एक पत्र प्रेषित कर राज्य कर्मचारियों 16 लाख पेंशनर्स, राज्य निधि से सहायता प्राप्त शिक्षण एवं प्राविधिक संस्थाओं के कर्मचारियों, स्वशासी संस्थाओं के कर्मचारियों एवं वर्क चार्ज, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को इस वर्ष का तदर्थ बोनस देने की मंशा का स्वागत किया है।
उन्होंने एक प्रेस विज्ञप्ति में अवगत कराया है कि सरकार ने कर्मचारियों को बढ़ी हुई दर पर महंगाई भत्ता एवं बोनस दोनों एक साथ देने का मन बनाया है, यह स्वागत योग्य कदम है।
उन्होंने कहा है कि योगी के नेतृत्व में सरकार कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है। केंद्र सरकार में जब भी महंगाई भत्ता की दरों में संशोधन होता है उत्तर प्रदेश, देश का पहला राज्य होता है जो अपने कर्मचारियों को महंगाई भत्ते का भुगतान सबसे पहले कर देता है ।इस बार जुलाई से 4% महंगाई भत्ता बढ़ने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को जुलाई से 4 % महंगाई भत्ता बढ़ाने का निर्णय ले लिया है। प्रदेश के कर्मचारियों को मुख्यमंत्री ने महंगाई भत्ता एवं बोनस दोनों एक साथ देने के बारे में विचार किया है, इससे कर्मचारियों में खुशी है। प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री जी के पोर्टल पर पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि बोनस के रूप में मिलने वाली धनराशि पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। छठे वेतन आयोग के आधार पर  वेतन क्रम (47600 _151100) सातवें वेतन आयोग में संशोधित वेतन मैट्रिक्स लेवल 8, छठे वेतन आयोग के अनुसार 4800 ग्रेड पे पाने वाले अराजपत्रित कर्मचारियों को बोनस का भुगतान किया जाता है।  बोनस गणना के लिए अधिकतम वेतन 7000 निर्धारित किया गया है। 7000 से अधिक परिलब्धियां पाने वाले कर्मचारियों को भी 7000 की परिलब्धियां के आधार पर ही बोनस दिया जाता है। लगभग सभी कर्मचारियों को समान रूप से 6908 का बोनस बनता है, जिसका 75% भाग भविष्य निधि खाते में जमा हो जाता है और एक चौथाई बोनस का भुगतान नकद किया जाता है।कर्मचारी को 1727/ का बोनस भुगतान होता है। इतने कम बोनस में कर्मचारी इस महंगाई के समय में त्योहार मनाने की खुशी के बारे में सोच भी नहीं सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि या तो बोनस गणना के लिए वेतन सीमा बढ़ाकर 18000 कर दी जाए या फिर संपूर्ण बोनस का भुगतान नगद कर दिया जाए। तभी कर्मचारियों को बोनस  मिलने से त्योहार का आनंद मिल सकता है।. संयुक्त परिषद की संयुक्त सचिव अरुणा शुक्ला ने मुख्य मंत्री से अनुरोध किया है कि सृजित पदों के सापेक्ष कार्यरत संविदा कर्मचारियों/ शिक्षकों को भी सरकार बोनस देने पर जरूर विचार करें। सरकार दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को बोनस दे रही है, तो संविदा कर्मचारियों/ शिक्षको को भी बोनस मिलना चाहिए ।उन्होंने यह भी कहा है कि राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, सकारात्मक निर्णय में सरकार के साथ है तथा अनावश्यक रूप से आंदोलन / हड़ताल की पक्षधर नहीं है। हड़ताल  /आंदोलन से जहां एक तरफ प्रदेश की विकास गति रूकती है वहीं दूसरी तरफ कर्मचारियों का भी नुकसान होता है।
जेएन तिवारी ने कहा है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष राजस्व में 935 करोड़ से अधिक की वसूली, कर्मचारियों की मदद और निष्ठापूर्वक काम करने से ही हुई है। ऐसी स्थिति में कर्मचारियों का बोनस बढ़ाया जाना सर्वथा उचित होगा। उन्होंने आशा व्यक्त किया है कि मुख्यमंत्री जी राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के सुझाव पर अवश्य विचार करेंगे। 

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By RKP News गोविन्द मौर्य

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