
बहराइच ( राष्ट्र की परम्परा) । महामना मालवीय मिशन के तत्वावधान में सिचाई एवं जल संसाधन कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को सामुहिक ज्ञापन देकर सरयू नदी के सौन्दरी करण व पंचवटी प्रजाती के वृक्षों का रोपण व संरक्षण हेतु सामुहिक ज्ञापन दिया गया।सिचाई एवं जल संसाधन बाढ़ नियंत्रण मंत्री को मालवीय मिशन की ओर से दिए गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है की रामायण कालीन सरयू नदी का उद्भव बहराइच जनपद के गोपिया मिहींपुरवा विकास खण्ड व गायघाट नामक स्थल पर हुआ है यही से सरयू जलधारा बहराइच नगर के गोलवाघाट , झींगहाघाट होते हुए गोण्डा जिले के पसका नामक स्थान से होते हुए अयोध्या पहुँचती है जिसके दोनों तरफ प्राचीनकाल से विभिन्न पर्व व त्योहार पर मेलें भी लग रहे हैं।मालवीय मिशन के पदाधिकारियों ने सिचाई मंत्री को अवगत कराया है कि सरयू नदी की जल धारा में श्रावस्ती चीनी मिल नानपारा का कचरा व गंदा जल तथा बहराइच नगर का विषाक्त गंदा जल लगातार गिराया जा रहा है जिसके चलते समूचा सरयू का पानी विषाक्त हो गया है।जलचर प्राणी लगभग समाप्त प्राय हो गए हैं , चौपाया जानवर भी सरयू नदी के किनारे जाने से कतराते हैं।महामना मालवीय मिशन अध्यक्ष ने मंत्री को ज्ञापन देकर अवगत कराया है की सरयू नदी के तटीय इलाकों में पंचवटी प्रजाती के पेंड लगाए जाएं तथा गायघाट , झिंगहघाट व गोलवाघाट स्थित पौराणिक मरी माता मंदिर का सौन्दरी करण व स्नान हेतु पक्के घाट का निर्माण , रैन बसेरा , विश्राम स्थल भी बनाया जाए ताकि रामायण कालीन सरयू नदी का माहात्म्य जन आस्था व श्रद्धा का विषय बना रह सके।मालवीय मिशन की ओर से सिचाई मंत्री को ज्ञापन देने वाले संगठन प्रतिनिधि मंडल में प्रमुख रूप से संरक्षक उत्तराधिकारी सेनानी संगठन अनिल त्रिपाठी , मालवीय मिशन जिला उपाध्यक्ष अनिल मिश्र एडवोकेट , उपाध्यक्ष डॉ० कपिल शुक्ल , जिला संगठन मंत्री पुण्डरीक पाण्डेय , समाजसेवी महेंद्र शर्मा व अध्यक्ष मालवीय मिशन अध्यक्ष संजीव श्रीवास्तव शामिल रहे। सिचाई मंत्री ने प्रतिनिधि मंडल को सरयू नदी के महात्म्य को पुनर्स्थापित व तटीय इलाकों के सौंदरी करण हेतु आश्वस्त किया है।
