Sunday, February 15, 2026
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सत्संग में आने से बुद्धि, विचार ,कर्म और आचरण होता है उत्तम – आचार्य अजय

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) मंगराइच में चल रहे भागवत कथा का अंतिम दिन
सलेमपुर, देवरिया । सलेमपुर क्षेत्र के मंगराइच में चल रहे भगवान शिव परिवार प्राण प्रतिष्ठा भागवत कथा महायज्ञ के अंतिम दिन श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराते हुए आचार्य अजय शुक्ल ने कहा कि सत्संग सुनने से मानव जीवन बदल जाता है। जब तक कर्मो की पूंजी है, इसका सुख भोग लें।बाद में यहीं आना पड़ेगा।यह मृत्यु लोक सबसे उत्तम है।मानव जीवन देवों से भी श्रेष्ठ है। इस चोले को पाने के लिए देवी देवता भी तरसते हैं।धर्म जोड़ता है तोड़ता नही है।सत्संग में आने से तन, मन,विचार, बुद्धि कर्म और आचरण उत्तम हो जाता है।
कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने ने कहा कि देवी रुक्मिणी विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री थी,यह रूपवती, गुणवान थी। इनका पूरा बचपन श्रीकृष्ण के साहस व वीरता की बातें सुनते व्यतीत हुआ। तभी से तय कर लिया कि हम विवाह करूंगी तो श्री कृष्ण से ,उसकी यह मनोकामना भगवान श्रीकृष्ण ने पूरा किया। भगवान को सच्चे मन से याद करने वाले की हर इच्छा वह पूरी करते हैं।भागवत कथा उसका सर्वश्रेष्ठ माध्यम है।कथा के दौरान यजमान रवींद्र तिवारी, आचार्य सुशील मिश्र, आचार्य देवानन्द दुबे,मयंक भूषण तिवारी, भरत तिवारी, शशिभूषण तिवारी, नमन तिवारी, रमेश तिवारी, प्रह्लाद तिवारी, रमेश कुमार, आदित्य तिवारी, प्रमोद तिवारी, बैभव, मदन तिवारी, रोहित तिवारी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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