Friday, June 12, 2026
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वर्ष के दृष्टिगत मोटा अनाज उत्पादन तकनीक पर कृषक प्रशिक्षण का आयोजन किया गया

बहराइच( राष्ट्र की परम्परा) नानपारा कृषि विज्ञान केंद्र पर अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के दृष्टिगत “रागी, मडुआ की उत्पादन तकनीक” विषय पर फसल सुरक्षा अनुभाग द्वारा एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. के.एम. सिंह ने की जिसमें उन्होंने खेत की तैयारी, बुवाई एवं रोपाई, बीज दर से लेकर कटाई तक विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिस खेत में जल प्रबंधन की उचित व्यवस्था हो उस खेत में मडुआ लगाना चाहिए एवं जून के द्वितीय सप्ताह बाद इसकी बुवाई करें। वैज्ञानिक डॉ. शशांक शेखर ने रागी से होने वाले स्वास्थ्य लाभ एवं उसके औषधीय और पोषकीय गुणों के बारे में चर्चा की। पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ हर्षिता ने बताया कि बुवाई से पहले स्युडोमोनास 8-10 ग्राम प्रति किलो बीज अथवा कार्बेंडाजिम 2 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीज शोधन करने से विभिन्न प्रकार के रोगों की रोकथाम की जा सकती है। डॉ सूर्य बली सिंह ने रागी की उन्नत किस्मों के बारे में जानकारी दी। कृषि विभाग के प्रभारी कृषि कल्याण केन्द्र के अमर सिंह ने बताया की श्रीअन्न के उत्पादन बढ़ावा हेतु बीजों की मिनीकिट किसानों को सरकार द्वारा निशुल्क दिया जा रहा है। कार्यक्रम में आदर्श कुमार त्रिपाठी, कैलाश वर्मा, हसन अहमद, हनुमान मौर्य, उषा देवी, सीता देवी, सर्वर अली, संजय कुमार श्रीवास्तव, निरंजन लाल समेत किसानों को चयनित रागी बीज प्रजाति वी. एल. मडुआ वितरित किया गया।

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