
तेहरान/वॉशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने रविवार, 30 अगस्त को ईरान के रणनीतिक लारक द्वीप पर मौजूद दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के जवान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में समुद्री बारूदी सुरंगों से जुड़े रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी कर रहे थे। इसके बाद अमेरिकी सेना ने कार्रवाई करते हुए दो लॉन्चरों पर हमला किया।
लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान का जवाब
ईरानी सरकारी मीडिया और IRGC के अनुसार, लारक द्वीप पर हुए अमेरिकी हमले में कई ईरानी लड़ाके और नागरिकों के मारे जाने तथा घायल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, हताहतों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि और उनकी सटीक संख्या स्पष्ट नहीं हो सकी है।
हमले के बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने जवाबी कार्रवाई की घोषणा की और कहा कि अमेरिकी हमले का जवाब देने के लिए संयुक्त मिसाइल ऑपरेशन चलाया गया।
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जॉर्डन में दो अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा
IRGC ने दावा किया कि उसने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों किंग हुसैन और अल-अजराक एयरबेस को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया।
ईरान की ओर से दावा किया गया कि हमले में अमेरिकी लड़ाकू विमानों की तैनाती वाले क्षेत्र और तकनीकी एवं मेंटेनेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया। हालांकि, नुकसान के स्तर को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से अलग दावे सामने आए हैं।
जॉर्डन की ओर दागी गईं मिसाइलें, कई को रोकने का दावा
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लारक द्वीप पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने जॉर्डन की दिशा में मिसाइलें दागीं। शुरुआती रिपोर्टों में कहा गया कि आने वाली अधिकांश मिसाइलों को एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा रोक दिया गया और किसी बड़े नुकसान की तत्काल पुष्टि नहीं हुई।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर भी बढ़ा तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का सबसे बड़ा केंद्र स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बना हुआ है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार और तेल मार्गों में से एक है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर कार्रवाई की जा रही है।
लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले और इसके बाद जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के जवाबी हमले के दावे ने मध्य पूर्व में एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की आशंका बढ़ा दी है। अब पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है।