लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय ने हरित एवं सतत परिसर के निर्माण की दिशा में एक और अहम उपलब्धि हासिल की है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में विश्वविद्यालय ने सौर ऊर्जा के प्रभावी उपयोग से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ बिजली खर्च में उल्लेखनीय बचत करते हुए 46.48 लाख रुपये का वित्तीय लाभ अर्जित किया है।
विश्वविद्यालय के अनुसार, वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 29,90,583 यूनिट बिजली की खपत हुई, जबकि सौर ऊर्जा संयंत्र से 9,04,953 यूनिट स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन किया गया। यह कुल विद्युत खपत का 30.26 प्रतिशत है। सौर ऊर्जा के उपयोग से विश्वविद्यालय ने बिजली खरीद पर 42.26 लाख रुपये की प्रत्यक्ष बचत की।
इसके अलावा नेट मीटरिंग व्यवस्था के तहत 49,130 यूनिट अतिरिक्त सौर ऊर्जा विद्युत ग्रिड को भेजी गई, जिसके बदले विश्वविद्यालय को 4.22 लाख रुपये का रिबेट मिला। इस तरह प्रत्यक्ष बचत और रिबेट मिलाकर कुल 46.48 लाख रुपये का वित्तीय लाभ प्राप्त हुआ।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के लिए 1000 किलोवाट क्षमता की नई सौर ऊर्जा परियोजना पर तेजी से कार्य चल रहा है। इसके पूरा होने के बाद विश्वविद्यालय की बिजली जरूरतों का बड़ा हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा होगा, जिससे बिजली व्यय और कार्बन उत्सर्जन दोनों में कमी आएगी।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि विश्वविद्यालय पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और सतत विकास लक्ष्यों को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा का अधिकतम उपयोग न केवल आर्थिक दृष्टि से लाभकारी है, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने भरोसा जताया कि विश्वविद्यालय भविष्य में भी हरित ऊर्जा और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए नवाचारपूर्ण प्रयास जारी रखेगा।
