Saturday, May 23, 2026
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पेट्रोल-डीजल की किल्लत से बढ़ी किसानों की चिंता, धान की बुआई और सिंचाई पर संकट

सलेमपुर, देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। सलेमपुर विकास क्षेत्र में लगातार गहराती पेट्रोल और डीजल की किल्लत अब किसानों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। एक तरफ पेट्रोलियम पदार्थों के बढ़ते दाम लोगों की जेब पर असर डाल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन उपलब्ध न होने से खेती-किसानी का कार्य प्रभावित होने लगा है। धान की नर्सरी और खेतों की जुताई का समय शुरू हो चुका है, लेकिन डीजल की कमी के कारण ट्रैक्टर और सिंचाई उपकरण ठप पड़ने लगे हैं।
क्षेत्र के ग्राम मधवापुर निवासी नमस्तुते पाण्डेय ने बताया कि धान की बुआई का समय आ गया है, लेकिन पेट्रोल पंपों पर डीजल उपलब्ध नहीं होने से ट्रैक्टर खड़े हैं और खेतों की जुताई नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि समय पर खेत तैयार नहीं होने से फसल उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
वहीं ग्राम चांदपलिता निवासी अभिषेक गुप्ता ने बताया कि आसपास के कई पेट्रोल पंपों पर डीजल खत्म हो चुका है। डीजल के अभाव में किसानों को सिंचाई करने में भी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि धान का बीज डालने का समय नजदीक है, लेकिन ईंधन संकट के कारण खेती का पूरा काम प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय किसान निखिल द्विवेदी का कहना है कि यदि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के दाम इसी प्रकार बढ़ते रहे और किल्लत बनी रही तो खेती करना किसानों के लिए और मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत के कारण छोटे और मध्यम किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं।
जानकारी के अनुसार सलेमपुर क्षेत्र के कई पेट्रोल पंपों पर पिछले कई दिनों से पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति बाधित है। क्षेत्र के इंडिया ऑयल ग्रामीण वितरण केंद्र बालपुर कला, ग्रामीण वितरण केंद्र मगहरा, जमुआ स्थित पेट्रोल पंप तथा महादहा समेत कई पंपों पर ईंधन खत्म होने से पंप बंद पड़े हैं। इससे वाहन चालकों के साथ-साथ किसान भी भारी परेशान हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पेट्रोल पंपों पर ईंधन न मिलने के कारण लोगों को कई किलोमीटर दूर तक भटकना पड़ रहा है। वहीं किसानों का आरोप है कि प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। किसानों ने मांग की है कि जल्द से जल्द क्षेत्र में डीजल और पेट्रोल की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाए, ताकि खेती-किसानी का कार्य प्रभावित न हो और किसानों को राहत मिल सके।

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