पश्चिम एशिया में जारी Middle East संकट का असर अब भारत के दवा बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। आम इस्तेमाल की दवाएं जैसे Paracetamol, Amoxicillin, Metformin और Azithromycin की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
फार्मा संगठनों के अनुसार ये दवाएं बुखार, संक्रमण, डायबिटीज और सांस संबंधी बीमारियों में बड़े पैमाने पर उपयोग की जाती हैं, ऐसे में कीमत बढ़ना आम लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
सरकार को भेजी गई इमरजेंसी रिपोर्ट
Federation of Pharma Entrepreneurs ने केंद्र सरकार को एक आपातकालीन पत्र भेजकर चेतावनी दी है कि यदि जल्द हस्तक्षेप नहीं हुआ तो देश में आवश्यक दवाओं की कमी हो सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, दवाओं में इस्तेमाल होने वाले API (Active Pharmaceutical Ingredients) यानी कच्चे माल की कीमतें मात्र 8-9 दिनों में 20% से 60% तक बढ़ गई हैं।
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पैकेजिंग और उत्पादन पर भी असर
सिर्फ कच्चा माल ही नहीं, बल्कि
• पीवीसी कंपाउंड
• दवा की बोतलें
• एल्यू-एल्यू और फॉयल
जैसी पैकेजिंग सामग्री की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। इससे दवा कंपनियों के लिए उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है और कई कॉन्ट्रैक्ट घाटे में बदल रहे हैं।
समुद्री सप्लाई पर संकट, फिर भी राहत की खबर
इस पूरे संकट के बीच Strait of Hormuz से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की सुरक्षित वापसी राहत की खबर लेकर आई है।
• INS Shivalik मुंद्रा पोर्ट पर 46,000 मीट्रिक टन LPG लेकर पहुंचा
• INS Nanda Devi वडिनार पोर्ट पर 46,500 मीट्रिक टन LPG के साथ पहुंचा
बताया जा रहा है कि भारत ने अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए क्षेत्र में वॉरशिप तैनात की थीं, जिससे सप्लाई चेन आंशिक रूप से बहाल हो सकी है।
क्या हो सकता है असर?
विशेषज्ञों के अनुसार अगर स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो:
• दवाओं की कीमतें और बढ़ सकती हैं
• बाजार में कमी देखने को मिल सकती है
• मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा
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