गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग में अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं सामुदायिक संवाद का आयोजन किया गया। इस अवसर पर Yale University के प्रोफेसर डॉ. ब्रायन वॉल तथा पब्लिक हेल्थ विशेषज्ञ डॉ. रघुकुल ने विभाग का भ्रमण कर शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के साथ विस्तृत चर्चा की।
संवाद के दौरान एनीमिया, क्षय रोग (टीबी) और कुपोषण जैसे प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य विषयों पर सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से प्रभावी रणनीतियों पर विचार किया गया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि इन समस्याओं के समाधान के लिए केवल चिकित्सा उपाय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि जन-जागरूकता, व्यवहार परिवर्तन और स्थानीय सहभागिता अत्यंत आवश्यक है।
विशेषज्ञों ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा बहुओं, स्वयं सहायता समूहों और किशोरियों की भागीदारी बढ़ाकर समुदाय-आधारित कार्यक्रमों को मजबूत बनाने पर जोर दिया। एनीमिया नियंत्रण के लिए आयरन-फोलिक एसिड सेवन, संतुलित आहार और नियमित जांच की आवश्यकता बताई गई, जबकि टीबी उन्मूलन के लिए प्रारंभिक पहचान, निरंतर उपचार और सामाजिक जागरूकता को अहम बताया गया। कुपोषण से निपटने के लिए पोषण शिक्षा, मातृ-शिशु देखभाल और स्थानीय खाद्य संसाधनों के उपयोग पर बल दिया गया।
इस अवसर पर ‘सेवार्थ प्रोजेक्ट’ के तहत येल यूनिवर्सिटी एम्स गोरखपुर और उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से संचालित गतिविधियों का उल्लेख किया गया, जिसमें गृह विज्ञान विभाग की सक्रिय भूमिका रही। विशेषज्ञों ने विभागाध्यक्ष प्रो. दिव्या रानी सिंह के नेतृत्व और शोधार्थियों के योगदान की सराहना की।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि भविष्य में एक विस्तृत एमओयू (एमओयू) तैयार कर कुलपति के समक्ष अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे संयुक्त शोध, सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को संस्थागत रूप दिया जा सके।
कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. दिव्या रानी सिंह, डॉ. अनुपमा कौशिक, गार्गी पाण्डेय, गरिमा यादव सहित कई शोधार्थी उपस्थित रहे। अंत में विभागाध्यक्ष ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे संवाद से विद्यार्थियों को वैश्विक दृष्टिकोण मिलेगा और विभाग की गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी।
