मातृशक्ति ‘अम्मा’ पुष्पलता सिंह व मनोरमा देवी का हुआ भावपूर्ण सम्मान
गोरखपुर(राष्ट्र क़ी परम्परा)
भोजपुरी भाषा, लोकसंस्कृति और पूर्वांचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित “फगुआ पर जुटान” कार्यक्रम रविवार क़ी देर शाम गंगोत्री देवी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय परिसर में अत्यंत उल्लास, आत्मीयता और सांस्कृतिक गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। “गोरखपुरिया भोजपुरिया” परिवार के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य आयोजन में शहर के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, पत्रकारों, कलाकारों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों तथा भोजपुरी संस्कृति के प्रेमियों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही।
फागुन की मादक बयार, लोकगीतों की मधुर धुन, फूलों की होली की रंगीन छटा और सांस्कृतिक आत्मीयता के इस अद्भुत संगम ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। कार्यक्रम भोजपुरी अस्मिता, लोकजीवन और सामाजिक एकता का जीवंत उत्सव बन गया, जिसमें उपस्थित लोगों ने अपनी संस्कृति के प्रति गर्व और अपनत्व का अनुभव किया।
कार्यक्रम की गरिमा महाविद्यालय की संरक्षिका एवं वरिष्ठ शिक्षाविद् रीना त्रिपाठी की गरिमामयी उपस्थिति से और अधिक बढ़ गई। आयोजन “गोरखपुरिया भोजपुरिया” संस्था के संस्थापक विकास श्रीवास्तव तथा सह-संस्थापक नरेंद्र मिश्र के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। यह आयोजन भोजपुरी भाषा और संस्कृति के संरक्षण का एक सशक्त मंच बनकर उभरा।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ मंच पर उपस्थित महिलाओं द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप की ज्योति ने नारी शक्ति के सम्मान और समाज निर्माण में महिलाओं की भूमिका को प्रतीकात्मक रूप से उजागर किया। इसके बाद उपस्थित महिलाओं को पुष्प अर्पित कर सम्मानित किया गया।
समाजसेवा और मातृत्व की प्रेरक प्रतिमाओं का सम्मान
कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक क्षण तब आया जब समाजसेवा और मानवीय करुणा की मिसाल बनी पुष्पलता सिंह ‘अम्मा’ तथा संघर्षशील मातृत्व की प्रतीक मनोरमा देवी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
पुष्पलता सिंह ‘अम्मा’, मातृ आंचल सेवा संस्थान, गोरखनाथ की संस्थापिका हैं और वर्षों से समाज के सबसे कमजोर, उपेक्षित और बेसहारा लोगों की सेवा में निरंतर जुटी हुई हैं। उन्होंने व्यक्तिगत जीवन के सुखों का त्याग करते हुए अविवाहित रहकर स्वयं को पूरी तरह मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया है।
अम्मा सड़क किनारे पड़े लावारिस और बीमार लोगों को उठाकर उनका उपचार कराती हैं, उन्हें भोजन और आश्रय उपलब्ध कराती हैं तथा जरूरतमंदों की हर संभव सहायता करती हैं। उनका सबसे उल्लेखनीय कार्य लावारिस शवों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार कराना है। अनेक अवसरों पर उन्होंने स्वयं मुखाग्नि देकर असंख्य लावारिस मृतकों को अंतिम सम्मान प्रदान किया है।
इसके अलावा वे रक्तदान शिविरों का आयोजन, गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, “अम्मा थाली” के माध्यम से भोजन वितरण, जरूरतमंदों को वस्त्र और चिकित्सा सहायता प्रदान करने तथा घायल पशुओं के उपचार जैसे सेवा कार्यों में भी सक्रिय रूप से जुड़ी रहती हैं। उनके उत्कृष्ट सेवा कार्यों के लिए उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जा चुका है। अम्मा स्वयं देहदान, अंगदान और रक्तदान के संकल्प से भी जुड़ी हुई हैं।
इसी क्रम में मनोरमा देवी को भी उनके संघर्षपूर्ण जीवन और प्रेरणादायी मातृत्व के लिए सम्मानित किया गया। पति के निधन के बाद उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी साहस और धैर्य का परिचय देते हुए अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं। सिलाई-कढ़ाई के कार्य से उन्होंने अपने परिवार का पालन-पोषण किया और अपने बच्चों की शिक्षा को निरंतर जारी रखा।
फाग गीतों से गूंज उठा परिसर
कार्यक्रम का सांस्कृतिक सत्र पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा। भोजपुरी लोकधुनों की मिठास और पारंपरिक फाग गीतों की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को उल्लास और उमंग से भर दिया।
प्रसिद्ध लोकगायक मनोज मिश्र ‘मिहिर’ ने पारंपरिक फाग और होली गीतों की ऐसी मनमोहक प्रस्तुति दी कि पूरा परिसर फागुन की मस्ती में झूम उठा। ढोलक की थाप और लोकधुनों की मधुरता ने श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। स्वर सागर संस्थान की निदेशिका सुनीषा श्रीवास्तव ने भी अपने मधुर स्वर में फाग गीत प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने तालियों की गूंज के साथ सराहा।
सांस्कृतिक संध्या में सुनीता तिवारी, सीता तिवारी, अतुल तिवारी तथा वरिष्ठ लेखक व उद्घोषक डॉ. संजय पति त्रिपाठी, डॉ टी विक्रम मणि त्रिपाठी, अनुपम मिश्र ने भी पारंपरिक फाग गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को उल्लासमय बना दिया।
वहीं डॉ. संजयन त्रिपाठी ने भी फाग गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं का मन मोह लिया और कार्यक्रम में फागुन की उमंग को और अधिक प्रखर बना दिया।
हास्य-व्यंग्य ने भी खूब बटोरी तालियां
कार्यक्रम में शैलेश त्रिपाठी ‘मोबाइल बाबा’ की हास्य-व्यंग्य प्रस्तुति भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने अपनी चुटीली शैली और समकालीन सामाजिक विषयों पर आधारित व्यंग्य के माध्यम से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मनोरंजन और विचार दोनों का सुंदर संतुलन प्रस्तुत किया।
फूलों की होली ने बढ़ाया आत्मीयता का रंग
कार्यक्रम के दौरान मंच और दर्शकों के बीच फूलों की होली खेली गई। गुलाब और गेंदे की पंखुड़ियों से सजी इस होली ने पूरे आयोजन को प्रेम और सौहार्द के रंगों से भर दिया। उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को फूलों से रंगते हुए होली की शुभकामनाएं दीं।
भोजपुरी संस्कृति के संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नरेंद्र मिश्र ने कहा कि भोजपुरी भाषा पूर्वांचल की आत्मा है। इसे संरक्षित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
वहीं विकास श्रीवास्तव ने कहा कि भोजपुरी संस्कृति सामाजिक संबंधों, परंपराओं और जीवन मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति है। ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
महाविद्यालय के प्रबंध निदेशक आशुतोष मिश्र ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।
गणमान्य व्यक्तियों ने की सराहना
कार्यक्रम के दौरान अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने आयोजन की सराहना की।
डॉ. ए.के. पांडेय व मांडवी तिवारी ने कहा कि भोजपुरी संस्कृति को जीवित रखने के लिए ऐसे आयोजनों का निरंतर होना आवश्यक है।
डॉ रामप्रताप विश्वकर्मा व डॉ पीएन भट्ट ने इसे समाज में सांस्कृतिक चेतना जगाने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
नवीन श्रीवास्तव व अंतरराष्ट्रीय हॉकी कोच श्रीमती रीता मिश्रा ने कहा कि “फगुआ पर जुटान” जैसे आयोजन समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते जा रहे हैं।
अभिषेक त्रिपाठी, बृजेंद्र सिंह व विनय तिवारी ने इसे भोजपुरी भाषा और परंपराओं के संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल बताया।
राजेश पांडेय, सागर श्रीवास्तव व रवि प्रकाश ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन समाज में आपसी सौहार्द और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करते हैं।
वी.के. सिंह ने कहा कि लोकसंस्कृति से जुड़े ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।
हरिहर पांडेय व रोहिताश श्रीवास्तव ने ने भोजपुरी भाषा को पूर्वांचल की पहचान बताते हुए इसके संरक्षण पर जोर दिया।
डॉ. गौरी पांडेय ने कहा कि महाविद्यालय परिसर में ऐसे आयोजन विद्यार्थियों और समाज में सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करते हैं।
नर्सिंग कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रकाश सिंह चौधरी ने कहा कि लोकगीत और परंपराएं समाज की आत्मा होती हैं और उन्हें जीवित रखना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ उद्घोषक सर्वेश दुबे ने अपनी प्रभावशाली और सधी हुई शैली में किया। उनके संयोजित और रोचक संचालन ने पूरे आयोजन को गरिमामय बनाए रखा।
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों एवं उपस्थित जनों के लिए जलपान की व्यवस्था की गई तथा “हमार भोजपुरी – हमार पहचान” के उद्घोष के साथ आयोजन का समापन हुआ। बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, पत्रकार, साहित्यकार और भोजपुरी संस्कृति के प्रेमी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
उपस्थित लोगों ने कहा कि “फगुआ पर जुटान” जैसे आयोजन भोजपुरी भाषा और लोकसंस्कृति को नई ऊर्जा देने के साथ समाज में प्रेम, सौहार्द और सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
