Tuesday, February 24, 2026
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14 मार्च को औरैया में राष्ट्रीय लोक अदालत, बैंक रिकवरी से लेकर सिविल वादों तक होगा समाधान

औरैया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद औरैया में आगामी 14 मार्च 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इसकी तैयारियां तेज कर दी गई हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से बताया गया कि यह लोक अदालत द्वितीय शनिवार को प्रातः 10 बजे से आयोजित होगी।

यह आयोजन के निर्देशानुसार किया जा रहा है। कार्यक्रम का संचालन जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मयंक चौहान के मार्गदर्शन में होगा।

राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने के लिए न्यायिक अधिकारियों एवं संबंधित विभागों के बीच समन्वय बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट एवं नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत विकास गोस्वामी तथा प्रभारी सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तारकेश्वरी प्रसाद सिंह ने संयुक्त रूप से बताया कि अधिकतम मामलों का सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। जिला प्रशासन ने बैंकों, विभागों और वादकारियों से सक्रिय सहयोग की अपील की है।

राष्ट्रीय लोक अदालत में सिविल वाद, राजस्व संबंधी वाद, क्रिमिनल कम्पाउंडेबल दाण्डिक वाद, बिजली चोरी से जुड़े प्रकरण, स्टाम्प अधिनियम से संबंधित मामले, श्रम विवाद, धारा 138 एनआई एक्ट के मामले, भूमि अधिग्रहण विवाद, नगर पालिका के लंबित प्रकरण तथा बैंक रिकवरी एवं अन्य वसूली संबंधी मामलों का निस्तारण किया जाएगा। सभी मामलों का समाधान आपसी सहमति और समझौते के आधार पर होगा।

लोक अदालत के निर्णय के विरुद्ध अपील का प्रावधान नहीं होता और इसका फैसला अंतिम व बाध्यकारी होता है। इससे समय और धन की बचत के साथ न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है। लोक अदालत का उद्देश्य त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आमजन से अपील की है कि जिनके मामले न्यायालयों, बैंकों या अन्य विभागों में लंबित हैं, वे इस अवसर का लाभ उठाकर सुलह-समझौते के माध्यम से विवादों का समाधान कराएं। लोक अदालतें न केवल विवाद निस्तारण का माध्यम हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी बढ़ावा देती हैं।

राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन को लेकर न्यायालय परिसर में आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। विभिन्न विभागों को लंबित मामलों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। बैंक एवं वित्तीय संस्थानों को भी रिकवरी से जुड़े मामलों में समझौते की संभावनाओं पर कार्य करने को कहा गया है। आयोजन के दिन अलग-अलग बेंचों का गठन कर संबंधित न्यायिक अधिकारी मामलों की सुनवाई करेंगे।

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