बलिया (राष्ट्र की परम्परा)
जनपद में बीते कुछ वर्षों के दौरान फिटनेस के प्रति लोगों की जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। खासकर युवाओं में बॉडी फिटनेस, मसल बिल्डिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शारीरिक दक्षता बढ़ाने को लेकर जिम की ओर रुझान तेजी से बढ़ा है। इसी के चलते नगर क्षेत्रों के साथ-साथ कस्बों और बड़े गांवों में भी जिमों की संख्या में इजाफा हुआ है।जनपद मुख्यालय के अलावा सिकंदरपुर, बेल्थरा रोड, रसड़ा और बांसडीह जैसे क्षेत्रों में भी निजी जिम संचालित हो रहे हैं। इनमें से कुछ जिम आधुनिक मशीनों और प्रशिक्षित ट्रेनरों के साथ बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं, जबकि कई स्थानों पर सीमित संसाधनों में जिम चलाए जा रहे हैं।विशेषज्ञों के अनुसार जिम संचालन के लिए संबंधित विभाग से पंजीकरण, अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र, स्वच्छता मानकों का पालन, प्राथमिक उपचार की व्यवस्था तथा प्रशिक्षित ट्रेनर की नियुक्ति आवश्यक है। हालांकि जनपद में सभी जिम इन मानकों का पूर्ण रूप से पालन कर रहे हों, यह कहना कठिन है। कई जिमों में सुरक्षा उपकरणों और आपातकालीन व्यवस्थाओं की कमी देखी गई है, जिससे किसी दुर्घटना की स्थिति में गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है।फिटनेस के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण कुछ संचालक आकर्षक ऑफर और कम शुल्क के जरिए युवाओं को जोड़ने का प्रयास करते हैं, लेकिन कम शुल्क के चलते सुविधाओं और सुरक्षा पर समझौता न हो, यह सुनिश्चित करना प्रशासन और संचालकों दोनों की जिम्मेदारी है।चिकित्सकों का मानना है कि बिना उचित मार्गदर्शन के अत्यधिक वजन उठाना, सप्लीमेंट्स का अनियंत्रित सेवन और गलत व्यायाम पद्धति अपनाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए जिम में नामांकन से पहले उसकी वैधता, ट्रेनर की योग्यता और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी लेना आवश्यक है। जनपद में जिम संस्कृति का विस्तार सकारात्मक संकेत है, क्योंकि इससे युवा नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहकर स्वास्थ्य के प्रति सजग हो रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही नियमों का पालन, नियमित निरीक्षण और पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी है। यदि प्रशासन समय-समय पर जांच कर मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करे, तो यह क्षेत्र सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से विकसित हो सकता है।
जनपद में चल रहे जिमों की स्थिति पर एक नजर
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