गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग तथा उत्तर प्रदेश राज्य अभिलेखागार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी का द्वितीय दिवस अकादमिक चर्चा और ऐतिहासिक भ्रमण के साथ सम्पन्न हुआ।
तकनीकी सत्र में शोधपत्र प्रस्तुत
दूसरे दिन आयोजित तकनीकी सत्र में विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने निम्न विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत किए:
• भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन
• उत्तर प्रदेश की भूमिका
• स्थानीय आंदोलन और गुमनाम नायक
• इतिहास लेखन की नई पद्धतियां
सत्र का संचालन डॉ. आशीष कुमार सिंह ने किया, जबकि कार्यक्रम संयोजक प्रो. मनोज कुमार तिवारी ने प्रथम दिवस की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए द्वितीय दिवस की रूपरेखा स्पष्ट की।
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प्रश्नोत्तर सत्र रहा सहभागितापूर्ण
शोधपत्र प्रस्तुति के बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने विषय विशेषज्ञों से संवाद कर शोध पद्धति, स्रोतों के उपयोग और ऐतिहासिक दृष्टिकोण पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त किया। विशेषज्ञों के सुझावों ने विमर्श को और गहराई प्रदान की।
समापन सत्र में डॉ. सुनीता ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए अतिथियों, वक्ताओं और शोधार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

ऐतिहासिक स्थलों का शैक्षणिक भ्रमण
संगोष्ठी के उपरांत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ संयुक्त रूप से शैक्षणिक भ्रमण किया।
इस दौरान प्रतिभागियों ने:
• कुशीनगर
• चौरी चौरा
के ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कर स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े प्रसंगों और सांस्कृतिक विरासत का प्रत्यक्ष अध्ययन किया।
अकादमिक विमर्श और अनुभव का संगम
संगोष्ठी का द्वितीय दिवस सैद्धांतिक अध्ययन और स्थल आधारित ज्ञान के समन्वय के साथ सम्पन्न हुआ। प्रतिभागियों को शोध, संवाद और ऐतिहासिक अनुभव का समग्र अवसर प्राप्त हुआ, जिससे उनके अध्ययन को नई दिशा मिली।
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