Thursday, February 19, 2026
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पंचायत मतदाता सूची पुनरीक्षण में लापरवाही पर प्रशासन की कड़ी कार्रवाई

कुशीनगर(राष्ट्र की परम्परा)पंचायत निर्वाचक नामावली के वृहद पुनरीक्षण अभियान के तहत चल रहे कुशीनगर डुप्लीकेट मतदाता सत्यापन कार्य में धीमी प्रगति पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत एवं नगरीय निकाय)/जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने विकास खंड सेवरही, सुकरौली और फाजिलनगर के खंड विकास अधिकारियों से तीन दिवस के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार डी-डुप्लीकेट मतदाताओं का सत्यापन और ऑनलाइन फीडिंग 20 फरवरी 2026 तक शत-प्रतिशत पूर्ण किया जाना अनिवार्य है। लेकिन 16 फरवरी तक की समीक्षा में तीनों विकास खंडों की स्थिति बेहद निराशाजनक पाई गई, जिससे जनपद की प्रदेश स्तरीय रैंकिंग पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
क्या है पूरा मामला?
पंचायत निर्वाचक नामावली के शुद्धिकरण के उद्देश्य से राज्य निर्वाचन आयोग ने संभावित डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान कर उनका भौतिक सत्यापन और ऑनलाइन डेटा अपडेट करने का विशेष अभियान चलाया है। आयोग के पत्र संख्या 631, दिनांक 20 अगस्त 2025 के माध्यम से सभी खंड विकास अधिकारियों को इस कार्य का नोडल अधिकारी नामित किया गया था।
इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मतदाता का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज न हो। यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
तीन विकास खंडों की प्रगति चिंताजनक
जिला प्रशासन द्वारा की गई समीक्षा में सामने आया कि कुशीनगर डुप्लीकेट मतदाता सत्यापन अभियान में तीन विकास खंड निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे हैं।
सेवरही विकास खंड
संभावित डुप्लीकेट मतदाता: 75,096
ऑनलाइन फीडिंग पूर्ण: 1,559
प्रगति प्रतिशत: लगभग 2.08%
सुकरौली विकास खंड
संभावित डुप्लीकेट मतदाता: 60,680
ऑनलाइन फीडिंग पूर्ण: 4,074
प्रगति प्रतिशत: लगभग 6.71%
फाजिलनगर विकास खंड
संभावित डुप्लीकेट मतदाता: 69,719
ऑनलाइन फीडिंग पूर्ण: 5,532
प्रगति प्रतिशत: लगभग 7.93%
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि निर्धारित समयसीमा के मुकाबले कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। प्रशासन ने इसे गंभीर लापरवाही की श्रेणी में माना है।
बीएलओ स्तर पर भी ढिलाई
समीक्षा में यह भी पाया गया कि बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा सत्यापन रिपोर्ट जमा करने की गति भी संतोषजनक नहीं है। कई स्थानों पर भौतिक सत्यापन अधूरा है, जबकि कुछ मामलों में ऑनलाइन फीडिंग में तकनीकी और मानवीय त्रुटियां सामने आई हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग ने भी जनपद की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया है, जिसके बाद जिला प्रशासन ने सख्ती बरतने का निर्णय लिया।
तीन दिन में जवाब, नहीं तो कानूनी कार्रवाई
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने संबंधित तीनों खंड विकास अधिकारियों को तीन दिवस के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया या निर्धारित समय में प्रस्तुत नहीं किया गया, तो उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 12 (ख)(घ) के अंतर्गत विधिक कार्रवाई की जाएगी।
यह कदम प्रशासन की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसमें चुनावी प्रक्रियाओं की शुचिता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।
क्यों जरूरी है डुप्लीकेट मतदाता सत्यापन?
लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची का शुद्ध और अद्यतन होना अनिवार्य है। यदि एक ही व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज हो जाता है, तो यह चुनावी पारदर्शिता को प्रभावित कर सकता है।
कुशीनगर डुप्लीकेट मतदाता सत्यापन अभियान के जरिए प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि आगामी पंचायत चुनाव निष्पक्ष और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हों।
विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल फीडिंग और आधार आधारित पहचान प्रणाली के उपयोग से भविष्य में इस प्रकार की विसंगतियों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
प्रशासन का सख्त संदेश
जिला निर्वाचन अधिकारी ने जनपद के सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि डी-डुप्लीकेट मतदाता सत्यापन एवं ऑनलाइन फीडिंग का कार्य हर हाल में निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण किया जाए।
साथ ही, यह भी कहा गया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, आगामी दिनों में विकास खंड स्तर पर विशेष मॉनिटरिंग टीमों की तैनाती की जा सकती है ताकि शेष कार्य को मिशन मोड में पूरा कराया जा सके।
प्रदेश स्तर पर छवि सुधारने की चुनौती
राज्य निर्वाचन आयोग की समीक्षा में जनपद की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई है। ऐसे में प्रशासन के सामने न केवल समयसीमा में कार्य पूर्ण करने की चुनौती है, बल्कि प्रदेश स्तर पर बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने की भी जिम्मेदारी है।
यदि समय पर डाटा फीडिंग और सत्यापन कार्य पूरा नहीं हुआ, तो इससे न केवल चुनावी प्रक्रिया प्रभावित होगी बल्कि संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी।
आगे की रणनीति
दैनिक प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य
बीएलओ की विशेष बैठकें
तकनीकी सहायता टीम की तैनाती
ब्लॉक स्तर पर समीक्षा बैठकें
लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण
प्रशासन का लक्ष्य है कि 20 फरवरी 2026 तक कुशीनगर डुप्लीकेट मतदाता सत्यापन कार्य 100 प्रतिशत पूर्ण कर लिया जाए।

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