मऊ (राष्ट्र की परम्परा)जनपद में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को नियंत्रित करने और यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट सभागार में जिला सड़क सुरक्षा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी श्री प्रवीण मिश्र ने की। इस दौरान सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, हिट एंड रन मामलों में सहायता राशि वितरण, ओवरस्पीडिंग पर नियंत्रण तथा कमर्शियल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा की गई।
बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। समीक्षा के दौरान सामने आया कि सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण ओवरस्पीडिंग है। आंकड़ों के अनुसार करीब 70 प्रतिशत सड़क हादसे तेज रफ्तार के कारण हो रहे हैं। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को विशेष प्रवर्तन अभियान चलाने के निर्देश दिए।
सड़क निर्माण एजेंसियों को दिए गए निर्देश
बैठक के दौरान अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी ने बताया कि जनप्रतिनिधियों, यातायात पुलिस और सेव लाइफ फाउंडेशन द्वारा चिन्हित कई सड़क सुरक्षा संबंधी कार्य अभी भी लंबित हैं। उन्होंने बताया कि पीडब्ल्यूडी की सड़कों पर 113 दुर्घटना संभावित स्थलों की पहचान की गई है।
जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) गोरखपुर और गाजीपुर के अधिकारियों को चिन्हित स्थानों पर जल्द से जल्द सुधार कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही पीडब्ल्यूडी को चिन्हित 113 स्थानों का सर्वे कर प्रस्ताव शासन को भेजने को कहा गया, ताकि दुर्घटना संभावित स्थानों पर समय रहते सुरक्षा उपाय लागू किए जा सकें।
हिट एंड रन मामलों में पीड़ितों को आर्थिक सहायता
बैठक में हिट एंड रन मामलों की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2024 के बाद से अब तक 60 हिट एंड रन मामलों को चिन्हित किया गया है। सरकार द्वारा ऐसे मामलों में मृतकों के आश्रितों को दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को सहायता राशि जल्द उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने पीड़ितों और उनके परिजनों से उपजिलाधिकारी कार्यालय में आवेदन करने की अपील भी की, ताकि सहायता वितरण में किसी प्रकार की देरी न हो।
कमर्शियल वाहनों की सुरक्षा पर विशेष जोर
सड़क दुर्घटनाओं में भारी और कमर्शियल वाहनों की भूमिका को देखते हुए जिलाधिकारी ने एआरटीओ और यातायात विभाग को बड़े वाहन मालिकों के साथ बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी कमर्शियल वाहनों में प्रशिक्षित ड्राइवरों की तैनाती अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए।
प्रशासन का मानना है कि प्रशिक्षित चालकों की कमी और लापरवाही भी सड़क हादसों का एक बड़ा कारण बन रही है। इसलिए वाहन मालिकों की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे।
पैदल और दोपहिया वाहन चालकों की लापरवाही भी बड़ी समस्या
बैठक में यह भी सामने आया कि सड़क दुर्घटनाओं में पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों और दोपहिया वाहन चालकों की लापरवाही भी प्रमुख कारण बन रही है। हेलमेट का उपयोग न करना, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन और गलत दिशा में वाहन चलाना दुर्घटनाओं की आशंका को बढ़ा रहा है।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को यातायात नियमों के प्रति जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक स्थानों पर सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करना बेहद आवश्यक है।
अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाने के निर्देश
बैठक में सड़क किनारे बढ़ते अतिक्रमण को भी दुर्घटनाओं का बड़ा कारण माना गया। जिलाधिकारी ने नगर पालिका परिषद और पुलिस विभाग को संयुक्त अभियान चलाकर सड़क किनारे से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नियमित कार्रवाई से यातायात व्यवस्था सुचारू होगी और दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी।
क्रिटिकल कॉरिडोर और ब्लैक स्पॉट चिन्हित करने पर जोर
प्रशासन ने सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जनपद के तीन क्रिटिकल कॉरिडोर और दस क्रिटिकल प्वाइंट चिन्हित करने का निर्णय लिया है। इन स्थानों पर विशेष निगरानी, संकेतक बोर्ड, स्पीड कंट्रोल उपाय और अन्य सुरक्षा संसाधन विकसित किए जाएंगे।
यातायात नियम उल्लंघन पर कार्रवाई के आंकड़े
बैठक में एआरटीओ ने प्रवर्तन कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि जनवरी महीने में कई यातायात नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की गई। इसमें बिना हेलमेट 304 चालान, बिना सीट बेल्ट 52 चालान, गलत दिशा में वाहन चलाने पर 17 चालान और ड्रंक एंड ड्राइव के 7 मामलों में कार्रवाई शामिल है।
इसके अलावा वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करने वाले 23 चालकों पर कार्रवाई की गई। ओवरलोडिंग करने वाले 14 वाहनों पर चालान किया गया। बिना लाइसेंस वाहन चलाने वाले 2, स्कूली वाहनों में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले 4 और बिना फिटनेस प्रमाणपत्र के 17 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को प्रवर्तन अभियान और तेज करने के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य सेवाओं को भी जोड़ा गया सड़क सुरक्षा से
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए कि ऐसे अस्पतालों की सूची तैयार की जाए जहां दुर्घटना पीड़ितों का कैशलेस इलाज और आयुष्मान कार्ड धारकों का उपचार संभव हो। इसका उद्देश्य दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विभागों के बीच बेहतर समन्वय और नियमित समीक्षा से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है। प्रशासन सड़क सुरक्षा को लेकर जनभागीदारी बढ़ाने पर भी जोर देगा।
बैठक में पुलिस विभाग, परिवहन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और लोक निर्माण विभाग सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे
