बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के घाघरा नदी किनारे स्थित दुहा बिहरा क्षेत्र में इन दिनों सफेद बालू का खनन तेज होने की चर्चा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि दिन-रात मशीनों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से बड़े पैमाने पर बालू निकासी की जा रही है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही।
रात में जेसीबी, दिन में ट्रैक्टर-ट्रॉली
ग्रामीणों के अनुसार, तटवर्ती इलाकों में जेसीबी मशीनों से खुदाई की जा रही है। देर रात तक वाहनों की आवाजाही जारी रहती है, जिससे गांवों में शोर और धूल की समस्या बढ़ गई है।
लोगों का कहना है कि अनियंत्रित खनन से नदी की धारा प्रभावित हो सकती है और तटबंधों की मजबूती पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
बरसात में कटान का खतरा
स्थानीय किसानों को आशंका है कि बरसात के मौसम में कटान की स्थिति और गंभीर हो सकती है। इससे उपजाऊ जमीन नदी में समा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित बालू खनन से:
• नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है
• जलस्तर में बदलाव आता है
• जैव विविधता को नुकसान पहुंचता है
• तट कटान की समस्या बढ़ती है
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो इसके दीर्घकालिक दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं।
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बिना अनुमति खनन का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिना वैध अनुमति के खनन किया जा रहा है। यदि अनुमति है भी, तो निर्धारित सीमा से अधिक बालू निकाली जा रही है। इससे राजस्व हानि के साथ-साथ पर्यावरणीय संकट गहरा सकता है।
खनन में लगे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की तेज रफ्तार से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। स्कूल जाने वाले बच्चों और राहगीरों को जोखिम उठाना पड़ रहा है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया अस्पष्ट
जब प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। सूत्रों के अनुसार, मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों तक पहुंचाई गई है और जांच की बात कही जा रही है।
अब सवाल यह है कि प्रशासन कब तक मौन रहेगा और अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी। क्षेत्रीय जनता ने जिला प्रशासन से तत्काल जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर कदम उठाने की मांग की है।
