आगरा। (राष्ट्र की परम्परा)खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) उत्तर क्षेत्र द्वारा स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए एक व्यापक प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम संजय पैलेस स्थित सूरसदन प्रेक्षागृह में आयोजित हुआ, जिसमें जनपद के एक हजार से अधिक स्ट्रीट फूड विक्रेताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का आयोजन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया गया, जिसका उद्देश्य आम नागरिकों तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना तथा स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक करना रहा।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कार्यशाला का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल और विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर कई वरिष्ठ प्रशासनिक एवं खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में एफएसएसएआई के संयुक्त निदेशक (प्रशिक्षण प्रभाग) अंकेश्वर मिश्रा, नगर मजिस्ट्रेट वेद सिंह चौहान, सहायक आयुक्त (खाद्य) उत्तर प्रदेश एफएसडीए सैयद शाहनाज हैदर आबिदी, एफएसएसएआई की प्रबंधक निमिशा तोमर तथा सहायक आयुक्त (खाद्य–II) महेंद्र श्रीवास्तव सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को दिया गया व्यवहारिक प्रशिक्षण
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। प्रशिक्षण में विशेष रूप से निम्न विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया—
खाद्य पदार्थों को स्वच्छता मानकों के अनुरूप तैयार करना
मिलावट रहित खाद्य सामग्री का उपयोग
सुरक्षित खाद्य भंडारण और संरक्षण तकनीक
व्यक्तिगत स्वच्छता और कार्यस्थल की साफ-सफाई
ग्राहकों के साथ विनम्र और जिम्मेदार व्यवहार
प्रशिक्षकों ने बताया कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए साफ पानी का उपयोग, उचित तापमान पर खाद्य सामग्री का संरक्षण तथा उपकरणों की नियमित सफाई बेहद आवश्यक है।
मंत्री ने दिलाई स्वच्छता और गुणवत्ता की शपथ
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल ने कहा कि भारत में स्ट्रीट फूड संस्कृति देश की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि स्ट्रीट फूड विक्रेताओं की जिम्मेदारी केवल भोजन बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा भी उनसे जुड़ी होती है।
उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सभी रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को स्वच्छता, गुणवत्ता और ईमानदारी के साथ खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की शपथ दिलाई। साथ ही प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले विक्रेताओं को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया गया।
खाद्य सुरक्षा से मजबूत होगी जनस्वास्थ्य व्यवस्था
कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार की कार्यशालाओं का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना ही नहीं बल्कि खाद्य सुरक्षा के राष्ट्रीय मानकों को जमीनी स्तर तक लागू करना भी है। इससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन मिलेगा और खाद्य जनित बीमारियों में कमी आएगी।
विशेषज्ञों ने बताया कि खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करने से स्ट्रीट फूड विक्रेताओं का व्यवसाय भी मजबूत होगा और ग्राहक विश्वास में वृद्धि होगी।
स्ट्रीट फूड विक्रेताओं की आजीविका को मिलेगा प्रोत्साहन
कार्यशाला में यह भी बताया गया कि खाद्य सुरक्षा मानकों को अपनाने से स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को अधिक ग्राहक मिलेंगे और उनकी आय में भी वृद्धि होगी। सरकार का उद्देश्य स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को संगठित क्षेत्र से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि भविष्य में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे ताकि खाद्य सुरक्षा को जन-जन तक पहुंचाया जा सके।
‘स्वस्थ भारत, सुरक्षित आहार’ अभियान को मिला बल
इस कार्यशाला को ‘स्वस्थ भारत, सुरक्षित आहार’ अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ खाद्य व्यवसाय से जुड़े छोटे व्यापारियों को भी नई पहचान और मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करने और स्वच्छता को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया
