भोपाल (राष्ट्र की परम्परा)। मध्य प्रदेश के देवास जिले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने राजोदा प्राथमिक कृषि सहकारी साख संस्था और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के खिलाफ 8 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। वर्ष 2016 से 2019 के बीच किसानों के नाम पर फर्जीवाड़ा कर ऋण वितरण और बीमा क्लेम में गड़बड़ी सामने आई है।
किसानों की जमीन बढ़ाकर स्वीकृत किया गया अतिरिक्त ऋण
ईओडब्ल्यू उज्जैन इकाई की जांच में खुलासा हुआ कि किसानों की वास्तविक भूमि से लगभग 400 हेक्टेयर अधिक भूमि दर्शाकर 5 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त ऋण मंजूर किया गया।
इसके अलावा बिना साख सीमा स्वीकृत किए 3 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण भी वितरित किया गया। यह सब किसानों की जानकारी के बिना किया गया, जिससे सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग हुआ।
एक ही सीजन में कई बार कराया गया फसल बीमा
जांच में यह भी सामने आया कि करीब 300 किसानों की फसल का एक ही सीजन में एक से अधिक बार बीमा कराया गया। इसके जरिए 65 लाख रुपये से अधिक का बीमा क्लेम लिया गया।
कई आवेदन पत्रों में आरोपियों के मोबाइल नंबर दर्ज पाए गए, जिससे फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई।
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सचिव पर खातों से निकासी का आरोप
समिति के तत्कालीन सचिव महेश जैन पर आरोप है कि उन्होंने किसानों के खातों से निकासी पर्चियों पर स्वयं हस्ताक्षर कर 1 करोड़ 12 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाल ली।
ऑडिट रिपोर्ट में समिति की कैशबुक में 20 लाख रुपये से अधिक की अनियमितता भी उजागर हुई है।
इन अधिकारियों पर दर्ज हुआ मामला
ईओडब्ल्यू ने महेश जैन (तत्कालीन सचिव), दिलीप नागर (तत्कालीन पर्यवेक्षक), अनिल दुबे (तत्कालीन शाखा प्रबंधक), रामकन्या बाई (अध्यक्ष) सहित अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले को लेकर सहकारी बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच एजेंसी अब संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल कर रही है।
