मऊ, (राष्ट्र की परम्परा)
प्रदेश सरकार द्वारा मीजिल्स और रूबेला जैसी संक्रामक बीमारियों के उन्मूलन के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य स्तर पर समीक्षा के बाद 16 फरवरी से मऊ सहित प्रदेश के 45 जिलों में एमआर टीकाकरण अभियान 2026 शुरू किया जाएगा। इस विशेष अभियान के तहत 5 से 10 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों को एमआर (मीजल्स-रूबेला) वैक्सीन की एक डोज दी जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह अभियान 27 फरवरी 2026 तक संचालित होगा। इस दौरान सरकारी स्कूलों, प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों तथा मदरसों में विशेष टीकाकरण सत्र आयोजित किए जाएंगे।
मीजिल्स-रूबेला उन्मूलन की दिशा में बड़ा कदम
एमआर टीकाकरण अभियान 2026 का मुख्य उद्देश्य मीजिल्स (खसरा) और रूबेला जैसी खतरनाक बीमारियों को जड़ से खत्म करना है। मीजिल्स एक अत्यंत संक्रामक रोग है जो बच्चों में गंभीर जटिलताएं उत्पन्न कर सकता है, जबकि रूबेला गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष रूप से खतरनाक मानी जाती है।
राज्य स्तर पर स्टेट टास्क फोर्स की बैठक में एमआर मामलों और टीकाकरण कवरेज की समीक्षा की गई। इसके बाद यह निर्णय लिया गया कि जिन जिलों में कवरेज अपेक्षाकृत कम है, वहां विशेष अभियान चलाकर सभी पात्र बच्चों को कवर किया जाए।
मऊ जनपद में भी एमआर टीकाकरण अभियान 2026 के तहत कक्षा 1 से 5 तक के सभी बच्चों को वैक्सीन दी जाएगी।
चरणबद्ध तैयारी के साथ अभियान की शुरुआत
स्वास्थ्य विभाग ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है।
23 जनवरी 2026 को राज्य स्तर से माइक्रोप्लान उपलब्ध कराया गया।
30 जनवरी तक ब्लॉक स्तर पर समन्वय बैठकें आयोजित की गईं।
7 फरवरी को मीडिया अभिमुखीकरण कार्यक्रम संपन्न हुआ।
10 से 12 फरवरी के बीच स्कूलों में माइक्रोप्लान तैयार कर संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
16 से 27 फरवरी 2026 के बीच टीकाकरण सत्र संचालित किए जाएंगे।
इस सुव्यवस्थित तैयारी के कारण एमआर टीकाकरण अभियान 2026 को प्रभावी और समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
हर स्कूल में विशेष टीकाकरण सत्र
मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निर्देशन में जिले के सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में एएनएम द्वारा स्कूलवार माइक्रोप्लान तैयार किया गया है। प्रत्येक स्कूल में निर्धारित तिथि पर विशेष टीकाकरण सत्र आयोजित होंगे।
हर सत्र में निम्नलिखित की उपस्थिति अनिवार्य होगी:
संबंधित क्षेत्र की एएनएम
आशा कार्यकर्ता
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
प्रत्येक एएनएम को प्रतिदिन 100 से 126 बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य दिया गया है। जिन स्कूलों में बच्चों की संख्या अधिक होगी, वहां अतिरिक्त सत्र आयोजित किए जाएंगे ताकि एमआर टीकाकरण अभियान 2026 के अंतर्गत कोई भी बच्चा छूट न सके।
पर्याप्त वैक्सीन और सुरक्षा प्रबंध
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि एमआर टीकाकरण अभियान 2026 के दौरान पर्याप्त मात्रा में एमआर वैक्सीन उपलब्ध रहेगी। इसके साथ ही ऑटो-डिसेबल (एडी) सिरिंज, एनाफाइलेक्सिस किट और अन्य आवश्यक लॉजिस्टिक की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।
सत्र स्थलों तक वैक्सीन पहुंचाने के लिए ब्लॉक स्तर पर उपलब्ध वाहनों का उपयोग किया जाएगा, जिनमें आरबीएसके टीम और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत उपलब्ध वाहन शामिल हैं।
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक सत्र स्थल पर आपातकालीन प्रबंधन के लिए आवश्यक दवाएं और उपकरण उपलब्ध रहेंगे।
यू-विन पोर्टल पर ऑनलाइन मॉनिटरिंग
डिजिटल निगरानी को मजबूत करने के लिए एमआर टीकाकरण अभियान 2026 के सभी सत्रों को ‘यू-विन’ पोर्टल पर पंजीकृत किया जाएगा। एमआर कैंपेन टैब पर सत्रों की योजना और प्रकाशन समय से किया जाएगा।
दैनिक प्रगति रिपोर्ट यू-विन पोर्टल और निर्धारित प्रपत्रों के माध्यम से दर्ज की जाएगी। इसके अतिरिक्त 12 माह से अधिक आयु के बच्चों का डेटा एचएमआईएस पोर्टल के मीजिल्स वैक्सीनेशन टैब पर भी अपडेट किया जाएगा।
जनपद, ब्लॉक और प्लानिंग यूनिट स्तर पर प्रतिदिन सायंकालीन समीक्षा बैठक आयोजित कर अभियान की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
अभिभावकों से विशेष अपील
स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को निर्धारित तिथि पर स्कूल भेजें और सुनिश्चित करें कि वे एमआर टीकाकरण अभियान 2026 के अंतर्गत वैक्सीन अवश्य लगवाएं।
विशेषज्ञों के अनुसार एमआर वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी है। इससे बच्चों को खसरा और रूबेला जैसी गंभीर बीमारियों से सुरक्षा मिलती है। समय पर टीकाकरण से भविष्य में संभावित जटिलताओं से बचाव संभव है।
क्यों जरूरी है एमआर टीकाकरण अभियान 2026?
मीजिल्स अत्यधिक संक्रामक रोग है
रूबेला गर्भस्थ शिशु के लिए खतरनाक हो सकता है
सामूहिक प्रतिरक्षा (हर्ड इम्युनिटी) के लिए उच्च कवरेज जरूरी
स्कूल आधारित अभियान से अधिकतम बच्चों तक पहुंच
एमआर टीकाकरण अभियान 2026 का लक्ष्य है कि प्रदेश में कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे और आने वाले वर्षों में मीजिल्स-रूबेला के मामलों में शून्य की दिशा में प्रगति हो।
निष्कर्ष
मऊ सहित 45 जिलों में 16 फरवरी से शुरू हो रहा एमआर टीकाकरण अभियान 2026 प्रदेश सरकार की एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पहल है। सुव्यवस्थित योजना, डिजिटल मॉनिटरिंग और स्कूल आधारित सत्रों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि 5 से 10 वर्ष आयु वर्ग का प्रत्येक बच्चा टीकाकरण से आच्छादित हो।
यदि यह अभियान निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप सफल होता है, तो प्रदेश मीजिल्स और रूबेला उन्मूलन की दिशा में एक मजबूत कदम आगे बढ़ाएगा।
