त्रिस्तरीय प्रतियोगिताओं में विजयी प्रतिभागियों एवं सम्बन्धित शिक्षकों को सम्मानित किया गया
गोरखपुर(राष्ट्र क़ी परम्परा)
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर शोधपीठ परिसर में “पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति व्याख्यान एवं पुरस्कार वितरण समारोह” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण, शोधार्थी, छात्र-छात्राएँ तथा विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षिक संगठनों से जुड़े गणमान्य व्यक्ति बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम मे विश्विद्यालय सहित जिलों के विभिन्न नोडल केंद्रों पर 01 फरवरी से 10 फरवरी तक आयोजित विभिन्न त्रिस्तरीय प्रतियोगिताओं में विजयी प्रतिभागियों को उनकी मेधा के लिए अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया, साथ ही इन प्रतियोगिताओ मे विश्वविद्यालय एवं विभिन्न जिलों के महाविद्यालयों में प्रतियोगिता कराने वाले प्राचार्य गण एवं शिक्षको को प्रमाणपत्र एवँ स्मृति चिन्ह भेट कर सम्मानित किया गया l
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गोरक्षप्रांत के प्रांत प्रचारक रमेश ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के जीवन-दर्शन, उनके एकात्म मानववाद के सिद्धांत तथा समकालीन परिप्रेक्ष्य में उसकी प्रासंगिकता पर अत्यंत प्रेरक एवं विचारोत्तेजक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय का चिंतन भारतीय संस्कृति की आत्मा से अनुप्राणित था और उनका एकात्म मानववाद आज भी राष्ट्र निर्माण के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे भारतीय चिंतन परंपरा को समझते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की किरण पहुँचाने का संकल्प लें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय का जीवन सादगी, समर्पण और राष्ट्रनिष्ठा का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा एवं राष्ट्रवादी चिंतन पर आधारित शोध एवं विमर्श को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
शोध पीठ की निदेशक प्रो. सुषमा पाण्डेय ने कहा कि शोधपीठ द्वारा आयोजित ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में वैचारिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों के संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, शोधपीठ द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को समृद्ध करने तथा पं. दीनदयाल उपाध्याय के राष्ट्रवादी चिंतन को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।
समारोह के दौरान विभिन्न शैक्षणिक एवं शोध उपलब्धियों के लिए चयनित प्रतिभाओं को पुरस्कार एवं सम्मान पत्र प्रदान किए गए। पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिवार का आभार व्यक्त करते हुए इसे अपने लिए प्रेरणास्रोत बताया। कार्यक्रम में त्रिस्तरीय प्रतियोगिताओं के जिलों के सभी नोडल अधिकारीयों प्रो. ओम प्रकाश सिंह, प्रो. बृजेश पांडेय, प्रो. ममता मणि त्रिपाठी, डॉ. रंजनलता, समन्वयक डॉ. आमोद राय को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया l
अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन शोधपीठ की निदेशक प्रो. सुषमा पाण्डेय द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संयोजन/समन्वयक डा. आमोद कुमार राय द्वारा किया गया। कार्यक्रम की प्रस्तावना उप-निदेशक डॉ. शैलेश सिंह द्वारा पढ़ा गया, संचालन डॉ. सूर्यकान्त त्रिपाठी द्वारा प्रभावी ढंग से किया, गया तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन उप-निदेशक डॉ. अमित उपाध्याय ने कियाl उक्त अवसर पर प्रो. चंद्रशेखर, प्रो. कीर्ति पाण्डेय, प्रो. उमा श्रीवास्तव, प्रो. शरद मिश्र, प्रो. विनोद सिंह, डॉ. राजेश सिंह, डॉ. मितू सिंह, डॉ. ममता चौधरी, डॉ. ज्योतिबाला, डॉ. अर्जुन सोनकर, डॉ. मुकेश सिंह, डॉ. मनीष पाण्डेय डॉ. आशीष शुक्ला, अजय तिवारी डॉ. विनीत पाण्डेय, डॉ. अरबिन्द पाण्डेय, रजनीकांत यादव, नित्या गुरुंग, रीमा यादव, अक्षिता यादव, अंशुमान दूबे, पीयूष मिश्र, अनीश सिंह, आदि की भूमिका सराहनीय रहीं l
