Tuesday, February 10, 2026
HomeNewsbeatबलिया में छात्र नेता प्रवीण कुमार सिंह पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई,...

बलिया में छात्र नेता प्रवीण कुमार सिंह पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई, चौथी बार जारी हुआ जमानती वारंट


बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
समाजवादी छात्र सभा के जिलाध्यक्ष एवं जनपद के सक्रिय छात्र नेता प्रवीण कुमार सिंह के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत की जा रही कार्रवाई ने एक बार फिर सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। उपजिलाधिकारी बांसडीह द्वारा उनके विरुद्ध चौथी बार जमानती वारंट जारी किए जाने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।प्रवीण कुमार सिंह जनपद में लंबे समय से छात्र राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वे समय-समय पर छात्रों, युवाओं, किसानों और आम जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलनधरना-प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाते रहे हैं। छात्र संघों और राजनीतिक संगठनों में उनकी सक्रिय भूमिका के चलते उन्हें एक मुखर छात्र नेता के रूप में जाना जाता है।जारी जमानती वारंट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रवीण कुमार सिंह ने प्रशासन की कार्रवाई को पूरी तरह राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि जिन मुकदमों को आधार बनाकर उनके खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई की जा रही है, उनमें से किसी भी मामले में अब तक आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया है। उनका आरोप है कि सभी मुकदमे उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर करने और डराने के उद्देश्य से दर्ज कराए गए हैं।प्रवीण सिंह ने यह भी कहा कि जमानती वारंट जारी करने से पूर्व उन्हें न तो कोई समन दिया गया और न ही किसी प्रकार की सूचना उपलब्ध कराई गई। उन्होंने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए कहा कि बिना सुने और बिना सूचना दिए इस तरह की कार्रवाई करना प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।
छात्र नेता का आरोप है कि उनकी बढ़ती राजनीतिक सक्रियता और छात्रों-किसानों के मुद्दों पर मुखर आवाज उठाने से कुछ लोग असहज हैं। इसी कारण उनके खिलाफ गुंडा एक्ट जैसे कड़े कानून का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यह पूरी कार्रवाई उन्हें जिला बदर करने की साजिश का हिस्सा हो सकती है, ताकि वे जनहित के मुद्दों पर आवाज न उठा सकें।प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि वे लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करते रहेंगे और इस कार्रवाई को कानूनी व राजनीतिक स्तर पर चुनौती देंगे। उन्होंने छात्र संगठनों, समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और आम जनता से समर्थन की अपील भी की है।इस पूरे मामले को लेकर छात्र राजनीति और विपक्षी दलों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि आंदोलन और विरोध को अपराध की श्रेणी में रखकर नेताओं पर गुंडा एक्ट लगाया जाएगा, तो यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है। वहीं, प्रशासनिक स्तर पर इस मामले में अभी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments