संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में कुछ सरकारी विभागों द्वारा नियमों की अनदेखी कर अपने करीबी लोगों को फायदा पहुंचाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। जिला पंचायत राज विभाग भी इसी तरह के एक प्रकरण को लेकर चर्चा में है। विभाग द्वारा एक चार पहिया वाहन यूपी 58 जेड 2367 को लगभग पचास हजार रुपये प्रतिमाह की दर से उपयोग में लिया जा रहा है, जबकि उस वाहन का विभाग से कोई अधिकृत अनुबंध नहीं बताया जा रहा है।
सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी विभाग को वाहन किराये पर लेने से पूर्व विधिवत टेंडर प्रक्रिया अपनानी होती है और केवल टैक्सी परमिट प्राप्त वाहन ही अनुबंध के लिए मान्य होते हैं। इसके बावजूद संबंधित विभाग में तय नियमों का पालन होता नहीं दिख रहा है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि जिला पंचायत राज विभाग जिले के प्रभावशाली विभागों में गिना जाता है, जहां कार्यरत अधिकारियों पर किसी प्रकार का दबाव असर नहीं डाल पाता। इससे पहले लोकायुक्त का एक आदेश भी इस विभाग के संबंध में जारी हुआ था, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। बाद में जब लोकायुक्त की ओर से स्मरण पत्र भेजा गया, तो प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ी और जिलाधिकारी की जिम्मेदारी भी सवालों के दायरे में आ गई।
अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला पंचायत राज अधिकारी के खिलाफ कब कार्रवाई होती है और नियमों के उल्लंघन के इस मामले में जिम्मेदारों पर कब सख्ती की जाएगी।
