Thursday, February 5, 2026
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ब्राह्मण हित कार्य के लिए पं. अजीत कुमार पाण्डेय सम्मानित

घोसी/मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। घोसी स्थित जेपी उद्यान में स्वर्गीय जेपी मिश्र की 71वीं जन्म जयंती एवं द्वितीय पुण्यतिथि को पितृ पर्व के रूप में श्रद्धा, सम्मान और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर समाज, संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों पर आधारित एक प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य (हरिनाम पीठ, अयोध्या धाम) रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में मनोजकांत सह (सह प्रचार प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) मौजूद रहे। इस दौरान श्रवण कुमार सम्मान भी प्रदान किया गया।

पितृ सत्ता और पुत्र धर्म पर गहन विचार

मुख्य अतिथि जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य ने पितृ सत्ता और पुत्र धर्म पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि पिता की आत्मा ही पुत्र के रूप में आती है और इस सत्य को आज के समय में समझना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज लोग पिता की संपत्ति और वसीयत तो लेना चाहते हैं, लेकिन उनके संस्कार, अनुशासन और जीवन मूल्यों को अपनाने से कतराते हैं। माता-पिता का सम्मान केवल संपत्ति या सत्ता के लिए नहीं, बल्कि उनके त्याग और आदर्शों के लिए होना चाहिए।

उन्होंने रामचरितमानस के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कर्तव्य और मर्यादा के महत्व को रेखांकित किया। स्वर्गीय जेपी मिश्र के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने घोसी नगर पंचायत अध्यक्ष रहते हुए अपने व्यापार और सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज की सेवा की और लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि किसी के चेहरे पर खुशी लाना ही सच्चा धर्म है और जिस दिन कोई पुत्र अपने पिता की पुण्यतिथि को पर्व के रूप में मनाने लगे, उस दिन समझना चाहिए कि भारत अपने मूल वैभव की ओर बढ़ रहा है।

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भारतीय संस्कृति में पितृ ऋण सर्वोपरि

जेपी फाउंडेशन के संस्थापक एवं स्वर्गीय जयप्रकाश मिश्र के पुत्र शैलेन्द्र मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में पितृ ऋण सर्वोपरि माना गया है और परिवार ही समाज की पहली पाठशाला होता है। उन्होंने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय जेपी मिश्र ने जीवनभर सादगी, परिश्रम और समाज सेवा को अपना धर्म माना। पितृ पर्व के रूप में जयंती और पुण्यतिथि मनाने का उद्देश्य नई पीढ़ी को माता-पिता के सम्मान, कर्तव्यबोध और भारतीय संस्कारों से जोड़ना है।

पं. अजीत कुमार पाण्डेय को मिला सम्मान

कार्यक्रम के दौरान बीएसएस परशुराम सेना (ब्राह्मण स्वयंसेवक संघ) के प्रदेश अध्यक्ष पं. अजीत कुमार पाण्डेय को ब्राह्मण हित में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें जेपी फाउंडेशन के संस्थापक स्वर्गीय जयप्रकाश मिश्र के पुत्र शैलेन्द्र मिश्र द्वारा प्रदान किया गया। सम्मान प्राप्त करते हुए पं. अजीत कुमार पाण्डेय ने कहा कि संगठन ब्राह्मण समाज के अधिकार, सम्मान और सामाजिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा और समाज को एकजुट करने का प्रयास आगे भी जारी रहेगा।

काव्य संग्रह का विमोचन

इस अवसर पर स्वर्गीय जेपी मिश्र की पुत्री एवं प्रसिद्ध कवयित्री डॉ. अलका प्रकाश के काव्य संग्रह “आलंग्य है प्रेम” का विमोचन भी किया गया। उन्होंने कहा कि यह संग्रह प्रेम, संवेदना और मानवीय मूल्यों की अभिव्यक्ति है, जिसकी प्रेरणा उन्हें अपने पिता से मिले संस्कारों और जीवन दृष्टि से प्राप्त हुई। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि पितृ पर्व के रूप में जयंती और पुण्यतिथि मनाना केवल पारिवारिक स्मरण नहीं, बल्कि समाज को संस्कारों से जोड़ने का सार्थक प्रयास है।

गणमान्य लोग रहे उपस्थित

कार्यक्रम में पूर्व विधायक उमेश चंद पाण्डेय, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता आनंद दुबे, पतंजलि के पूर्वांचल प्रभारी बृज मोहन, सुनील गुप्त, फागू सिंह, ब्राह्मण विकास परिषद के अध्यक्ष ऋषिकेश पाण्डेय, समाजसेवी विजय शंकर त्रिपाठी, किसान नेता देवप्रकाश राय, वरिष्ठ अधिवक्ता कालिकदत्त पाण्डेय एडवोकेट, सतीश कुमार पाण्डेय एडवोकेट, उमाशंकर उपाध्याय एडवोकेट सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन श्रद्धांजलि, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संदेश के साथ हुआ।

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