प्रयागराज (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र एवं संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘चलो मन गंगा–यमुना तीर’ कार्यक्रम के अंतर्गत सोमवार को त्रिवेणी तट लोकगायन, लोकनृत्य और भक्तिरस की अनुपम छटा से सराबोर रहा। विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत अंकिता चतुर्वेदी की सुमधुर गायन प्रस्तुति से हुई। उन्होंने “सब तीर्थ का राजा जग में पावन प्रयागराज है”, “मेरे भोले नाथ जी”, “मेरे नाम से पहले सियाराम लिख देना”, “मृगनयनी को यार”, “नवल रसिया” तथा सूफी रचना “दमा दम मस्त कलंदर” प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
इसके बाद मीना खन्ना एवं उनके दल ने लोकनृत्य (फोकस वर्ड):चलो मन गंगा–यमुना तीर(टैग):प्रयागराज, त्रिवेणी तट, लोकगायन, लोकनृत्य, संस्कार भारती, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, भारतीय लोकसंस्कृति, सांस्कृतिक कार्यक्रम
महाराष्ट्र से आए विशाल गेंदले एवं उनके साथी कलाकारों ने वाद्य यंत्र बैंड की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। राग हंसध्वनि और राग यमन की शास्त्रीय जुगलबंदी के साथ भजन “ओम जय जगदीश हरे”, “श्रीराम चंद्र कृपालु भजमन”, “रघुपति राघव राजा राम” और “अच्युतम् केशवम्” की प्रस्तुति ने श्रोताओं को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में जवाबी बिरहा का आयोजन हुआ, जिसमें दिलीप कुमार यादव, संतोष चंचल, गोविन्द पाल, अर्चना, यशपाल, सत्यप्रकाश पटेल, ममता पटेल एवं यज्ञ नारायण ने बिरहा के माध्यम से लोकजीवन की संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के समापन पर उपनिदेशक डॉक्टर आदित्य श्रीवास्तव, उपनिदेशक (कार्यक्रम) डॉक्टर मुकेश उपाध्याय, विभव मिश्रा एवं संस्कार भारती के महामंत्री द्वारा कलाकारों को पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया।
