भागलपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण और मुख्यमंत्री आवास योजना–ग्रामीण के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों के चयन को लेकर शासन स्तर से बड़ा और स्पष्ट संदेश सामने आया है। ग्राम विकास विभाग, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी पत्र में साफ किया गया है कि दोनों योजनाओं में लाभार्थियों की पात्रता सूची का अंतिम अनुमोदन ग्राम सभा के माध्यम से ही किया जाएगा।ग्राम प्रधान संगठन, उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष कौशल किशोर पाण्डेय द्वारा उठाए गए बिंदुओं के संदर्भ में शासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण पूर्णतः भारत सरकार द्वारा संचालित योजना है। इसमें लाभार्थियों के चयन से लेकर आवास आवंटन तक की पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार संपन्न होती है।शासन के अनुसार, सर्वेक्षण के बाद पात्र पाए गए परिवारों की प्राथमिकता सूची को जनपद स्तर पर गठित जिला स्तरीय समिति से अनुमोदित कराया जाता है। इसके बाद इस सूची का ग्राम सभा की खुली बैठक में अनुमोदन अनिवार्य रूप से कराया जाता है, जिससे पारदर्शिता और जनभागीदारी सुनिश्चित हो सके।इसी प्रकार मुख्यमंत्री आवास योजना–ग्रामीण, जो राज्य सरकार द्वारा संचालित है, उसमें भी लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया स्पष्ट रूप से निर्धारित है। इस योजना में भी पात्र परिवारों की प्राथमिकता सूची की जांच जनपद स्तरीय समिति द्वारा की जाती है और अंततः ग्राम सभा में प्रस्तुत कर अनुमोदित कराई जाती है।शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि दोनों योजनाओं में पात्रता सूची के अंतिम अनुमोदन में ग्राम सभा की भूमिका पहले से ही निर्धारित और सुरक्षित है। इसलिए इस विषय में किसी भी प्रकार की भ्रांति या संशय की कोई आवश्यकता नहीं है।अंत में शासन ने संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा की है कि वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समयबद्ध और निष्पक्ष कार्यवाही सुनिश्चित करें, ताकि पात्र लाभार्थियों को समय पर आवास का लाभ मिल सके और योजनाओं का उद्देश्य पूर्ण
