Sunday, February 1, 2026
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Sanitary Pad Mandatory In Schools: स्कूलों में सेनेटरी पैड अब सुविधा नहीं, बच्चियों का अधिकार – सुप्रीम कोर्ट

Sanitary Pad Mandatory In Schools: स्कूल में अचानक पीरियड आ जाना कई बच्चियों के लिए परेशानी भरा होता है। इसी समस्या को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अब स्कूलों में सेनेटरी पैड उपलब्ध कराना कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि बच्चियों का मौलिक अधिकार माना जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि मासिक धर्म से जुड़ी सेहत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सभी राज्यों और शिक्षा विभागों को निर्देश दिया है कि हर स्कूल में लड़कियों के लिए सेनेटरी पैड की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

अगर कोई स्कूल इस जिम्मेदारी से पीछे हटता है या लापरवाही बरतता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। जरूरत पड़ने पर स्कूल की मान्यता रद्द करने तक का कदम उठाया जा सकता है।

कहां करें शिकायत?

अगर किसी स्कूल में सेनेटरी पैड उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, तो:

• जिला शिक्षा अधिकारी (DEO)

• जिला कार्यक्रम पदाधिकारी
को लिखित शिकायत दी जा सकती है।

शिकायत में ये बातें जरूर शामिल करें:

• स्कूल का नाम

• तारीख

• समस्या का विवरण

• संभव हो तो फोटो या अन्य सबूत

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अगर जिला स्तर पर सुनवाई न हो:

• राज्य शिक्षा विभाग

• महिला एवं बाल विकास विभाग

• राज्य/राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग

• महिला आयोग या मानवाधिकार आयोग
में भी शिकायत की जा सकती है।

क्या-क्या नियम तय किए गए हैं?

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार:

• लड़कियों के लिए अलग और साफ शौचालय

• सेनेटरी पैड की आसान उपलब्धता

• इस्तेमाल किए गए पैड को सुरक्षित तरीके से निपटाने की व्यवस्था

• कई स्कूलों में Menstrual Hygiene Corner बनाने के निर्देश

ये नियम सरकारी और प्राइवेट दोनों स्कूलों पर समान रूप से लागू होंगे। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर शिक्षा विभाग कार्रवाई कर सकता है।

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