महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। लोकतंत्र की आधारशिला माने जाने वाले मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य के दौरान महिला सरकारी कर्मचारी के साथ हुई हिंसा ने प्रशासन और समाज दोनों को झकझोर कर रख दिया है। थाना कोतवाली ठूठीबारी क्षेत्र के ग्राम ठूठीबारी टोला धर्मौली में महिला बीएलओ और आंगनवाड़ी कार्यकत्री के साथ सरेआम मारपीट, अभद्रता और सरकारी कार्य में बाधा डालने का गंभीर मामला सामने आया है।
पीड़िता मंजू यादव उर्फ मंजू देवी, पुत्री जगदीश, बीएलओ (भाग संख्या-8) के पद पर कार्यरत हैं। 27 जनवरी को वह अपने घर पर मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य कर रही थीं। इसी दौरान गांव निवासी कृष्णा पुत्र स्व. प्रेमलाल अपनी पत्नी लक्ष्मी का नाम मतदाता सूची में जुड़वाने से संबंधित जानकारी लेने पहुंचा।
नियमों के अनुसार आवश्यक दस्तावेज—मायके की मतदाता सूची और परिवार रजिस्टर की प्रमाणित प्रति—मांगे जाने पर आरोपी ने दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। इसके बाद पीड़िता द्वारा नियमानुसार नोटिस जारी किया गया, जिससे आरोपी आक्रोशित हो गया।
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आरोप है कि कृष्णा ने अपने भाई इंद्र कमल को बुलाकर पीड़िता से गाली-गलौज की, सरकारी कागजात छीनकर फाड़ दिए और बाल पकड़कर घर से बाहर खींचते हुए सड़क पर पटक दिया। इस दौरान लात-घूंसे मारे गए और कपड़े खींचकर अभद्रता की गई।
बीच-बचाव करने पहुंचे पीड़िता के वृद्ध पिता के साथ भी मारपीट की गई और उन्हें नाली में धक्का दे दिया गया। हमले में महिला बीएलओ को सिर, छाती, पीठ, कमर और जांघ समेत कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं।
घटना के बाद आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए। पीड़िता की तहरीर पर थाना ठूठीबारी पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यह घटना न केवल महिला सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बढ़ती हिंसा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती है।
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