भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के पूर्व अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह बिंद्रा (IS Bindra) का रविवार को 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। इस दुखद खबर की पुष्टि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के चेयरमैन जय शाह ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से की।
जय शाह ने इमोशनल पोस्ट साझा करते हुए लिखा,
“भारतीय क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेशन के दिग्गज और पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष आईएस बिंद्रा के निधन पर गहरी संवेदनाएं। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। ॐ शांति।”
अचानक बिगड़ी तबीयत, शाम को हुआ निधन
परिवार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, रविवार दोपहर भोजन करने के बाद इंद्रजीत सिंह बिंद्रा की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी थी। इसके बाद शाम लगभग 6:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही क्रिकेट प्रशासन से जुड़े कई दिग्गजों और खेल प्रेमियों ने शोक व्यक्त किया।
सोमवार को होगा अंतिम संस्कार
पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह बिंद्रा का अंतिम संस्कार सोमवार दोपहर लोधी शमशान घाट में किया जाएगा। उनके अंतिम दर्शन के लिए क्रिकेट जगत से जुड़े कई बड़े नामों के पहुंचने की संभावना है।
BCCI अध्यक्ष के रूप में अहम भूमिका
इंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने 1993 से 1996 तक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली। उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय क्रिकेट प्रशासन को मजबूती मिली और कई अहम फैसले लिए गए, जिन्होंने आगे चलकर भारतीय क्रिकेट की दिशा तय की।
पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन से लंबा जुड़ाव
बीसीसीआई अध्यक्ष बनने से पहले और बाद में भी बिंद्रा का पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (PCA) से गहरा नाता रहा।
उन्होंने 1978 से 2014 तक करीब 36 वर्षों तक पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर कार्य किया। उनके लंबे कार्यकाल को पंजाब क्रिकेट के विकास के लिए बेहद अहम माना जाता है।
IS Bindra Stadium: सम्मान की पहचान
क्रिकेट प्रशासन में उनके योगदान को सम्मान देते हुए वर्ष 2015 में मोहाली के पीसीए स्टेडियम का नाम बदलकर आईएस बिंद्रा स्टेडियम रखा गया। यह स्टेडियम आज भी उनके योगदान की पहचान के रूप में जाना जाता है और कई अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों का गवाह रहा है।
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1987 वर्ल्ड कप में अहम भूमिका
क्रिकेट इतिहास में इंद्रजीत सिंह बिंद्रा का नाम एक और बड़ी उपलब्धि से जुड़ा हुआ है।
माना जाता है कि 1987 क्रिकेट वर्ल्ड कप की मेजबानी भारत को दिलाने में इंद्रजीत सिंह बिंद्रा और बीसीसीआई के एक अन्य पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया ने अहम भूमिका निभाई थी। यह टूर्नामेंट भारतीय क्रिकेट के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ।
क्रिकेट जगत में शोक की लहर
इंद्रजीत सिंह बिंद्रा के निधन पर क्रिकेट प्रशासकों, खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने गहरा दुख जताया है। उनका जीवन भारतीय क्रिकेट प्रशासन के लिए प्रेरणास्रोत रहा है। उन्होंने न केवल संगठनात्मक मजबूती दी बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय क्रिकेट की पहचान को भी मजबूत किया।
विरासत जो प्रेरणा देती रहेगी
आईएस बिंद्रा का नाम भारतीय क्रिकेट इतिहास में हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा। बीसीसीआई और पीसीए में उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी। उनका प्रशासनिक अनुभव, दूरदर्शिता और क्रिकेट के प्रति समर्पण भारतीय खेल जगत की अमूल्य धरोहर है।
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