सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा ) शुक्रवार को संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर प्रधानमंत्री को सलेमपुर नायब तहसीलदार के द्वारा ज्ञापन दिया गया ।
इस सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मज़दूर, खेतिहर एवं ग्रामीण मज़दूर—भारत के समस्त मेहनतकश लोग—भारत सरकार द्वारा थोपी जा रही कॉरपोरेट-समर्थक, किसान-विरोधी और मज़दूर-विरोधी नवउदारवादी नीतियों का कड़ा विरोध करते हैं। हम 2020–21 में तीन काले कृषि क़ानूनों को थोपने के प्रयास का सफलतापूर्वक प्रतिरोध करने के बाद किसानों से किए गए सभी वादों पर संघीय सरकार द्वारा किए जा रहे विश्वासघात के साक्षी हैं।
9 दिसंबर 2021 को, भारतीय किसानों के एक वर्ष से अधिक चले ऐतिहासिक संघर्ष—जिसे मजदूर वर्ग का सक्रिय समर्थन मिला था और जिसमें 736 अमूल्य जानें कुर्बान हुई थी—के बाद हुए समझौते में, भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और किसानों की बढ़ती ऋणग्रस्तता के मुद्दों के समाधान हेतु एक समिति गठित करने की प्रतिबद्धता जताई थी।
सत्ता में मौजूद यह कॉरपोरेट–सांप्रदायिक गठजोड़ इस प्रतिबद्धता को निभाने में पूरी तरह विफल रहा है। तब से आज तक उत्पादन लागत के अनुरूप एमएसपी में कोई वृद्धि नहीं हुई है; फसल मूल्यों का स्तर एम.एस. स्वामीनाथन फ़ॉर्मूले से 20 से 30 प्रतिशत कम बना हुआ है। सभी कृषि लागतों, विशेषकर उर्वरकों की कीमतें, सब्सिडी की कटौती और काला बाज़ारी—दोनों के कारण—तेज़ी से बढ़ी हैं। सुनिश्चित ख़रीद की विफलता के चलते बाज़ार में अधिकांश फसलें घोषित एमएसपी से भी 20 से 40 प्रतिशत कम दामों पर बिक रही हैं।
दिसंबर 2021 के समझौते में भारत सरकार ने किसानों से परामर्श किए बिना बिजली संशोधन विधेयक लागू न करने का वादा किया था। इसके बावजूद मोदी सरकार नया बिजली विधेयक 2025 ले आई है, जो सभी के लिए महगी और एक सामान बिजली दर अनिवार्य करता है, कृषि सहित सभी कमज़ोर वर्गों के लिए दी जाने वाली क्रॉस-सब्सिडी को समाप्त करता है और प्री-पेड स्मार्ट मीटर थोपता है। हम स्पष्ट करते हैं कि कॉरपोरेट के लिए जनता की इस लूट को हम किसी भी क़ीमत पर होने नहीं देंगे। इस सभा को संबोधित करते हुए किसान सभा के जिला मंत्री कांग्रेस प्रेमचंद यादव ने कहा कि हम गहरे आघात और पीड़ा के साथ नोट करते हैं कि सरकार ने बीज विधेयक 2025 के माध्यम से बीज आपूर्ति पर कॉरपोरेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का पूर्ण बाज़ार नियंत्रण थोप दिया है। इससे फसल पैटर्न में भारी बदलाव आएगा, जो जीविकोपार्जन आधारित खेती के लिए घातक होगा तथा देश की बीज संप्रभुता और खाद्य सुरक्षा को गंभीर ख़तरे में डालेगा। इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। खेत व ग्रामीण मजदूर यूनियन यूनियन के जिला मंत्री राम निवास यादव ने कहा कि
हम मनरेगा को समाप्त कर उसकी जगह वीबी ग्राम जी अधिनियम 2025 लागू किए जाने का भी कड़ा विरोध करते हैं। यह क़ानून काम के अधिकार और कम से कम 100 दिनों की रोज़गार गारंटी को छीनता है, ‘माँग आधारित काम’ के अधिकार को समाप्त करता है और 125 दिनों के काम के झूठे दावे के विपरीत, बजटीय आवंटन में भारी कटौती करता है। साथ ही यह राज्यों पर 40 प्रतिशत अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालता है।
हम इस सरकार द्वारा चार श्रम संहिताओं के ज़रिये देश के मजदूर वर्ग पर किए गए हमले की निंदा करते हैं—ये संहिताएँ मजदूर वर्ग द्वारा दशकों के संघर्ष से हासिल यूनियन बनाने का अधिकार, न्यूनतम जीविका योग्य मज़दूरी, सुरक्षित रोज़गार, 8 घंटे का कार्यदिवस, सामाजिक सुरक्षा जैसे अधिकारों को छीनती हैं। कार्यस्थल पर सुरक्षा। इससे मजदूर वर्ग को कॉरपोरेट पूंजी का गुलाम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। खेत व ग्रामीण मजदूर यूनियन के राज्य कमेटी सदस्य बलविंदर मौर्य ने कहा कि
हम जनवादी अधिकारों पर हो रहे हमलों से बेहद उद्वेलित हैं—दमनकारी क़ानूनों, अवैध प्रशासनिक दमन और बुलडोज़र राज के ज़रिये असहमति की हर आवाज़ को कुचला जा रहा है। सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, पत्रकार आदि वर्षों से बिना मुक़दमे के जेलों में बंद हैं। भाजपा शासित क्षेत्रों में हर विरोध को बेरहमी से कुचल दिया जाता है।
हम आरएसएस–भाजपा गठजोड़ और उनकी सरकारों द्वारा देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने और जनता की एकता को नष्ट करने के प्रयासों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं। अल्पसंख्यकों और दलितों पर हमले, योजनाबद्ध मॉब लिंचिंग, नफ़रत भरे भाषणों की श्रृंखला, यहाँ तक कि न्यायिक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप—ये सब आज की सच्चाई बन चुके हैं। हम देश की एकता और उसके धर्मनिरपेक्ष जनतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करने का संकल्प लेते हैं।
इस सभा को संबोधित करते हुए राज्य कमेटी सदस्य कामरेड गंगा देवी और कामरेड पूनम देवी ने कहां की
हम जानते हैं कि मेहनतकश जनता के जीवन और आजीविका पर ये सभी गंभीर हमले, कॉरपोरेट–सांप्रदायिक सरकार द्वारा नवउदारवादी पूंजीवाद के गहरे संकट से उबरने और बहुराष्ट्रीय व भारतीय कॉरपोरेट घरानों तथा देश के धन्नासेठों के हितों की सेवा करने का प्रयास हैं।
हम यह भी गंभीरता से कहना चाहते हैं कि यह सरकार भारतीय कृषि और उद्योग के हितों से गद्दारी करते हुए अमेरिकी साम्राज्यवाद के सामने शर्मनाक आत्मसमर्पण कर रही है। मुक्त व्यापार समझौते भारतीय अर्थव्यवस्था को बहुराष्ट्रीय कंपनियों की लूट के लिए खोलने का माध्यम हैं।
हम किसान, मज़दूर, खेतिहर एवं ग्रामीण मज़दूर तथा आम जनता के विशाल हिस्से के साथ, 16 जनवरी 2026 को यहाँ इक्कठा होकर, दशकों लंबे संघर्षों से अर्जित अनुभव के आधार पर यह दृढ़ संकल्प लेते हैं कि भाजपा-नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के सभी किसान-विरोधी, मज़दूर-विरोधी और जन-विरोधी क़ानूनों व नीतियों के विरुद्ध एकजुट होकर संघर्ष करेंगे, जब तक कि इन सभी को वापस नहीं लिया जाता। हम जनता की एकता के लिए कार्य करने तथा ऐसे जन-पक्षधर क़ानून और नीतियाँ सुनिश्चित करने का संकल्प लेते हैं, जो लोगों को बुनियादी अधिकार एवं सम्मानजनक जीवन प्रदान करें।
जब तक संघीय सरकार निम्नलिखित को रद्द नहीं करती—
• बीज विधेयक 2025
• बिजली विधेयक 2025
• वीबी–ग्राम जी अधिनियम 2025
• चार श्रम संहिताएँ
और जब तक हम संघीय सरकार को निम्नलिखित क़ानून बनाने के लिए बाध्य नहीं कर देते—
• सभी फसलों के लिए सी2 लागत + 50% के अनुसार एमएसपी तथा सुनिश्चित सरकारी ख़रीद
• सम्पूर्ण क़र्ज़ माफी
o किसान और दिहाड़ी मज़दूरों की आत्महत्याओं को समाप्त करने के लिए
o तथा ग्रामीण क़र्ज़ग्रस्तता के ख़ात्मे के लिए
• भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 (एल.ए.आर.आर. एक्ट 2013) का पूर्ण क्रियान्वयन
• राज्यों के संघीय अधिकारों की रक्षा
• राज्यों की टेक्स शक्ति की बहाली
• विभाज्य कर पूल का 60% हिस्सा राज्यों को आवंटित किया जाए
हम भारत के मेहनतकश लोग
नववर्ष 2026 में यह संकल्प लेते हैं—
“विजय तक निरंतर, एकजुट और अखिल भारतीय संघर्ष का निर्माण करेंगे।” इस सभा में कामरेड नियाज अहमद कामरेड राजकुमारी देवी, शिव कुमारी देवी , बाबूलाल ,कामरेड संजय , कामरेड प्रदीप कुमार कामरेड भारती, सुशील यादव, रामचंद्र खरवार आदि सैकड़ो लोग शामिल रहे
