Saturday, January 24, 2026
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बिन मोल की मिट्टी हुई अनमोल, बुंदेलखंड बदल रहा है विकास की रफ्तार से

बुंदेलखंड (राष्ट्र की परम्परा)। कभी सूखा, पलायन और किसान आत्महत्याओं के लिए पहचाना जाने वाला बुंदेलखंड अब विकास की नई तस्वीर के साथ देश के सामने खड़ा है। खेतों के बीच दौड़ता बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, चौड़े लिंक मार्ग, सोलर प्रोजेक्ट, प्लाटिंग और बढ़ता कारोबार इस बदलाव की गवाही दे रहे हैं। जो इलाका कभी खेती के नुकसान से जूझता था, वहां अब जमीन सोना बन चुकी है।

296 किलोमीटर का एक्सप्रेसवे, बदलती तकदीर

इटावा से चित्रकूट तक करीब 296 किलोमीटर लंबा बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे

• जालौन के 64 गांव
• चित्रकूट के 9 गांव
• बांदा के 28 गांव
• महोबा के 8 गांव
• हमीरपुर के 29 गांव से होकर गुजरता है।

एक्सप्रेसवे के दोनों ओर सोलर प्रोजेक्ट लगाए जा रहे हैं। जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को भारी मुआवजा मिला, जिससे पक्के मकान बने, गाड़ियां खरीदी गईं और जीवनशैली बदली।

खदान मजदूर से होटल मालिक तक

चित्रकूट के गोंडा गांव पहुंचे तो दुकानदार विजय शंकर पटेल मिले। पहले पत्थर खदान में काम करते थे, अब उनकी अपनी दुकान है और होटल खोलने की तैयारी चल रही है।
यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड की बदलती पहचान है।

प्लाटिंग की होड़, लेकिन किसान जमीन बेचने को तैयार नहीं

हमीरपुर के सरीला निवासी देवमणि बताते हैं कि एक्सप्रेसवे के हर टोल प्लाजा के आसपास प्रॉपर्टी डीलरों का जमावड़ा है।
“मुंहमांगी कीमत देने को तैयार हैं, लेकिन किसान जमीन बेच नहीं रहे।”
खोही क्षेत्र के किसान जय नारायण सिंह बताते हैं कि जो जमीन पहले 2.5–3 लाख रुपये बीघा थी, वह अब 10 से 15 लाख रुपये में भी नहीं मिल रही।

बुंदेलखंड की मिट्टी बनी निवेश का जरिया

चित्रकूट से बांदा तक सफर में जमीन की कीमतों में जबरदस्त उछाल दिखा।
महोखर निवासी आशुतोष बताते हैं कि उनके पिता को दो करोड़ रुपये मुआवजा मिला। अब प्लाटिंग कर रहे हैं।
बेंदा गांव के पूर्व प्रधान विवेक सिंह के अनुसार,
“गिट्टी-मोरंग छोड़कर लोग जमीन के कारोबार में उतर आए हैं।”

स्क्वायर फीट में बिक रही खेती की जमीन

यमुना और बेतवा के फोरलेन हाईवे के किनारे खेती की जमीन अब मकानों और दुकानों में बदल रही है।
जो जमीन 500 रुपये प्रति स्क्वायर फीट थी, वह अब 1500 से 2000 रुपये तक पहुंच चुकी है।

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24 घंटे कारोबार, बढ़ा रोजगार

हमीरपुर-कबरई मार्ग पर होटल संचालक जयाशंकर लोधी बताते हैं कि पहले शाम होते ही सन्नाटा छा जाता था।
अब 24 घंटे यातायात है, इसलिए होटल में तीन शिफ्ट में 30 लोगों को रोजगार दिया जा रहा है।
बांदा-महोबा फोरलेन बनने से जहां कभी क्रेशर की धूल उड़ती थी, वहां अब होटल, बाजार और उद्योग पनप रहे हैं।

सोलर प्लांट और नए उद्योग

महोबा के बारीपुरा निवासी दयाशंकर चौरसिया बताते हैं कि सोलर कंपनियां जमीन किराये पर ले रही हैं।
खाली पड़ी जमीन अब आय का साधन बन चुकी है।
कनेक्टिविटी बढ़ने से कारखाने, होटल और बाजार तेजी से तैयार हो रहे हैं।

नौकरी छोड़ लौट रहे युवा

झांसी में ब्रांडेड शोरूम चला रहे पंकज बताते हैं कि बेहतर सड़कें आने से कारोबार आसान हुआ है।

“पढ़े-लिखे युवाओं ने नए तरीके से व्यापार शुरू किया है। खरीदने की क्षमता बढ़ी है, इसलिए बाहर नौकरी कर रहे लोग भी लौट रहे हैं।”

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