Thursday, January 15, 2026
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संभल बवाल केस: 22 पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगी पुलिस, एसपी ने आरोपों को बताया निराधार

संभल (राष्ट्र की परम्परा)। संभल में हुए बवाल के मामले में तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी और तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर समेत 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है। इसके बजाय संभल पुलिस मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के आदेश को चुनौती देने की तैयारी में जुट गई है। पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने साफ किया है कि इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर उसे निरस्त कराने की मांग की जाएगी।

एसपी का दावा: पुलिस ने गोली नहीं चलाई

एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि बवाल के दौरान पुलिस की ओर से कोई फायरिंग नहीं की गई थी। जिस युवक को गोली लगने का दावा किया जा रहा है, वह पुलिस की गोली नहीं है। उन्होंने कहा कि पीड़ित के पिता द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी का प्रमोशन हो चुका है और वे वर्तमान में फिरोजाबाद में एएसपी के पद पर तैनात हैं, जबकि तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर इस समय चंदौसी कोतवाली में तैनात हैं।

यामीन ने लगाए गंभीर आरोप

खग्गू सराय निवासी यामीन ने अनुज चौधरी, अनुज तोमर समेत 15–20 अज्ञात पुलिसकर्मियों को नामजद करते हुए आरोप लगाया है कि बवाल के दौरान पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें उनके बेटे आलम को तीन गोलियां लगीं।
यामीन का कहना है कि आलम ठेले पर बिस्किट बेचता है और 24 नवंबर की सुबह भी रोज़ की तरह बिस्किट बेचने निकला था। इसी दौरान पुलिस फायरिंग में वह घायल हुआ। बाद में छिपकर उसका इलाज कराया गया, जिससे उसकी जान बच सकी।

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प्रशासन ने आरोपों को किया खारिज

डीएम और एसपी दोनों ने यामीन के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि बवाल सुबह 7:45 बजे भीड़ द्वारा किया गया था।
प्रशासन के अनुसार, जामा मस्जिद तक ठेला पहुंचना संभव नहीं था, क्योंकि वहां पुलिस-प्रशासन की तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैनात थी। ऐसे में ठेले के साथ युवक के वहां पहुंचने का दावा तथ्यहीन है।

पहले से दिव्यांग है आलम

आलम की बहन रजिया ने बताया कि उसका भाई पहले से ही दिव्यांग है और तीन पहिया ठेले से बिस्किट बेचकर परिवार का खर्च चलाता था। गोली लगने के बाद उसकी हालत काफी कमजोर हो गई है। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है और इलाज के लिए उन्हें उधार तक लेना पड़ा है।

धमकाने का आरोप, परिवार डरा

रजिया ने आरोप लगाया कि पुलिस उनके परिवार को लगातार धमका रही है। एक साल से पूरा परिवार मानसिक तनाव में है। उन्होंने कहा कि जब अधिकारियों ने उनकी बात नहीं सुनी तो मजबूरी में पिता को कोर्ट का सहारा लेना पड़ा। फिलहाल परिवार भय के माहौल में जी रहा है और पिता व भाई घर से बाहर चले गए हैं।

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