बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र के एक गांव में प्रेम प्रसंग से जुड़ा अंतरजातीय विवाह का मामला इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। तीन वर्षों से चले आ रहे प्रेम संबंध के चलते युवती ने सामाजिक दबाव और परिजनों के विरोध के बावजूद अपने प्रेमी के साथ जीवन बिताने का फैसला किया, जिससे गांव में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव निवासी युवक और युवती पिछले करीब तीन वर्षों से एक-दूसरे से प्रेम करते थे। दोनों एक ही गांव के रहने वाले हैं और उनके घर भी आमने-सामने स्थित हैं। हालांकि, जाति भिन्न होने के कारण परिजन इस रिश्ते के खिलाफ थे। सामाजिक दबाव के चलते परिजनों ने युवती की शादी किसी अन्य स्थान पर तय कर दी थी, जिसकी तारीख 10 फरवरी निर्धारित थी। शादी की तैयारियां भी जोरों पर थीं।
शौच के बहाने निकली युवती, फिर नहीं लौटी
रविवार की सुबह युवती शौच के बहाने घर से निकली, लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटी। काफी खोजबीन के बावजूद जब उसका कोई पता नहीं चला तो परिजन सिकंदरपुर थाने पहुंचे और गुमशुदगी व संभावित अपहरण की आशंका जताई। रविवार से ही परिजन थाने के चक्कर लगाते रहे, ताकि युवती को ढूंढकर वापस लाया जा सके।
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प्रेमी संग न्यायालय पहुंचने की सूचना
इसी बीच परिजनों को सूचना मिली कि युवती अपने प्रेमी के साथ न्यायालय पहुंच गई है, जहां दोनों ने विवाह और सुरक्षा से संबंधित कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह जानकारी सामने आते ही ग्रामीणों के बीच चर्चाएं और तेज हो गईं। लोग इसे प्रेम और सामाजिक बंधनों के टकराव के रूप में देख रहे हैं।
पुलिस जांच में जुटी
इस मामले में थानाध्यक्ष मूलचंद चौरसिया ने बताया कि पुलिस सभी तथ्यों की जांच कर रही है। युवती की उम्र, उसकी स्वेच्छा और सुरक्षा जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के तहत दोनों पक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की प्राथमिकता है।
यह घटना स्थानीय स्तर पर सामाजिक सोच, परंपराओं और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है। अब इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
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