मानव जीवन में सुख-दुःख तो
बहता पानी है इनसे क्यों डरना,
आजीवन प्रभू का गुणगान करना,
उनकी कृपा, भवसागर पार होना।

सर्दी का प्रकोप प्रचंड बढ़ा है,
पर हमने जरा नहीं घबराना है,
मुश्किल घड़ी लेती परिक्षा है,
उसमें पास हो दिखालाना है।

मौसम भी इस क़दर ख़ुमारी में है,
लखनऊ शिमला जैसा दिखता है,
इसलिये अलाव का मजा लीजिये,
सोंधी खुशबू, लिट्टी चोखा खाइए।

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देखे हैं मात्र एक लँगोटी में निवस्त्र,
कण्ठ में झूलती जिनके रुद्राक्ष माल,
कड़कड़ाती सर्दी में बज रहा डमरू,
धूनी रमाये मिलते हैं हमारे धर्म गुरू।

रवि की मकरगति, मकरसंक्रांति,
महाकुंभ स्नान संगम प्रयागराज में,
अखाड़ों में साधू संतों का जमघट,
आदित्य यह है भारतीय संस्कृति।

डॉ. कर्नल
आदिशंकर मिश्र ‘आदित्यसी