बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। बीते करीब तीन माह से वार्षिक अनुरक्षण और साफ-सफाई के नाम पर बंद पड़ी नहरों के चलते क्षेत्र के किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। रबी की प्रमुख फसल गेहूं की सिंचाई पूरी तरह प्रभावित हो गई थी। समय पर पानी न मिलने से खेतों में खड़ी फसल मुरझाने लगी थी और कई स्थानों पर पौधे सूखने की कगार पर पहुंच चुके थे।
नहरों में पानी न होने के कारण किसानों को निजी संसाधनों से सिंचाई करनी पड़ रही थी, जिससे लागत में लगातार इजाफा हो रहा था। डीजल और बिजली के बढ़ते दामों ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी थीं। खासकर छोटे और सीमांत किसान अतिरिक्त खर्च उठाने में असमर्थ हो गए थे।
किसानों की इस गंभीर समस्या को देखते हुए सिंचाई विभाग में हलचल मची। विभागीय अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लेते हुए मंगलवार देर रात पूर रजवाहा सहित क्षेत्र की अन्य माइनरों में पानी छोड़े जाने की व्यवस्था की।
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नहरों में पानी आते ही खेतों में फिर से जान लौट आई। बुधवार सुबह से ही किसान अपने-अपने खेतों में सिंचाई कार्य में जुट गए। सूखती फसल को पानी मिलते ही पौधों की हरियाली लौट आई और किसानों के चेहरों पर भी रौनक दिखाई देने लगी। खेतों में पानी बहता देख किसानों ने राहत की सांस ली।
किसानों का कहना है कि यदि समय रहते नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाता, तो गेहूं की पैदावार पर गंभीर असर पड़ता। इससे न केवल किसानों को आर्थिक नुकसान होता, बल्कि भविष्य में खाद्यान्न संकट की आशंका भी बढ़ जाती।
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क्षेत्र के किसानों ने उम्मीद जताई कि आगे भी नहरों की नियमित निगरानी की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या दोबारा उत्पन्न न हो और किसानों को समय पर सिंचाई का लाभ मिलता रहे।
