✍️ कैलाश सिंह
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भारत आज युवा शक्ति के दम पर एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। देश की 65% से अधिक जनसंख्या युवा है, और यही युवा आने वाले भारत की दिशा, दृष्टि और पहचान तय करने वाले हैं। बदलते समय के साथ युवा शक्ति की उड़ान ने देश को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलानी शुरू कर दी है, लेकिन इस उड़ान की रफ्तार कितनी स्थिर और कितनी सुरक्षित है, यही असली सवाल है।
तकनीक, स्टार्टअप, नवाचार, शिक्षा और डिजिटल क्रांति ने युवाओं को नए अवसर दिए हैं। आज भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम का केंद्र बन चुका है। नए–नए विचार, नई ऊर्जा और नए प्रयोग देश को आगे बढ़ाने की ताकत बन रहे हैं।लेकिन युवा शक्ति के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। रोजगार की कमी, प्रतियोगी माहौल में बढ़ता दबाव, संसाधनों की सीमित उपलब्धता और कौशल विकास में खामियां ये सभी मुद्दे उड़ान को धीमा करने का काम करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि देश अपने युवाओं की क्षमताओं का सही उपयोग करे, तो भारत सिर्फ एक आर्थिक शक्ति ही नहीं, बल्कि ज्ञान, नवाचार और विश्व नेतृत्व में भी नई पहचान बना सकता है। सरकार द्वारा चलाई जा रहीं कई योजनाएं जैसे स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल स्किल मिशन, मेक इन इंडिया युवाओं को बड़े अवसर दे रही हैं, पर इनके परिणाम तब ही प्रभावी होंगे जब इन्हें जमीनी स्तर पर और तेजी से लागू किया जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भी आज पीछे नहीं हैं। इंटरनेट क्रांति ने गांव के युवाओं को भी बड़ा मंच दिया है। चाहे ऑनलाइन शिक्षा हो, डिजिटल व्यवसाय, ई-कॉमर्स या सरकारी योजनाएं अब मौके सबके लिए हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि उन्हें सही दिशा और अवसर मिले।
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युवा ही देश की असली पूंजी हैं, और इन्हीं की काबिलियत से भारत का भविष्य चमकता हुआ नज़र आएगा लेकिन यह सवाल भी उतना ही बड़ा है—क्या देश की नीतियां और व्यवस्थाएं युवाओं के सपनों की उड़ान को नई ताकत दे पाएंगी?और क्या यह युवा शक्ति भारत को नई वैश्विक पहचान दिलाने में सफल होगी?युवाओं की ऊर्जा, देश का संकल्प और सही दिशा यही तीन तत्व आने वाले भारत की तस्वीर तय करेंगें।
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