Saturday, November 29, 2025
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“फ़ूड–प्लानेट–हेल्थ” विषयक ऑनलाइन कार्यशाला सम्पन्न

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)। वेगन आउटरीच एवं दिग्विजय नाथ पी.जी. कॉलेज, गोरखपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना (एन.एस.एस.) की चारो इकाइयों के संयुक्त तत्वावधान में ‘‘फ़ूड–प्लानेट–हेल्थ’’ विषयक एक दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में भोजन संबंधी आदतों, पर्यावरणीय प्रभावों और स्वास्थ्य के आपसी संबंध को समझाना तथा सतत जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यशाला का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ओमप्रकाश सिंह के कर–कमलों से हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापवृद्धि जैसी चुनौतियों से निपटने हेतु युवा पीढ़ी को जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। भोजन–आधारित पर्यावरणीय प्रभाव आज वैश्विक विमर्श का प्रमुख विषय है और एन.एस.एस. की यह पहल सराहनीय है।
कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के सहायक आचार्य एवं एन.एस.एस. के कार्यक्रम अधिकारी डॉ.जितेन्द्र कुमार पाण्डेय ने किया। उन्होंने विगन आउटरीच के उद्देश्यों तथा पौध–आधारित जीवनशैली के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह संस्था स्वास्थ्य, पर्यावरण और पशु–कल्याण तीनों क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन हेतु कार्यरत है। उन्होंने कहा कि युवाओं में जागरूकता बढ़ाना समय की मांग है और ऐसी कार्यशालाएँ इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विगन आउटरीच के अभिषेक जी रहे। उन्होंने “फ़ूड–प्लानेट–हेल्थ” विषय पर विस्तृत वैज्ञानिक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि आधुनिक पशु–आधारित खाद्य प्रणाली पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों पर भारी दबाव डालती है, जिससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, वनों की कटाई तथा जल–उपभोग में अत्यधिक वृद्धि होती है। उनके अनुसार, पौध–आधारित भोजन अपनाने से कार्बन फ़ुटप्रिंट में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
स्वास्थ्य संबंधी चर्चा में उन्होंने बताया कि पौध–आधारित भोजन हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा तथा कई दीर्घकालिक बीमारियों के जोखिम को कम करता है। प्राकृतिक फाइबर, विटामिन और एंटी–ऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन शारीरिक स्वास्थ्य के साथ–साथ मानसिक संतुलन एवं ऊर्जा स्तर को भी बढ़ाता है।
अभिषेक जी ने पशु–कल्याण के नैतिक पक्ष को रेखांकित करते हुए कहा कि भोजन का चुनाव केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और मानवीय करुणा का भी प्रश्न है। उन्होंने एन.एस.एस. स्वयंसेवकों को प्रेरित किया कि वे समाज में जागरूकता फैलाने और पर्यावरण–हितैषी आदतों को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभाएँ।
कार्यशाला में महाविद्यालय की एन.एस.एस. की चारों इकाइयों के स्वयंसेवक एवं स्वयंसेविकाएँ बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं। विद्यार्थियों ने विषय से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका उत्तर मुख्य वक्ता ने सरल एवं वैज्ञानिक शैली में दिया। संवाद सत्र ने छात्रों में विषय के प्रति गहरी समझ और रुचि पैदा की।
अंत में कार्यक्रम अधिकारी श्री पाण्डेय ने सभी प्रतिभागियों और वक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एन.एस.एस. छात्रों में सामाजिक चेतना, पर्यावरणीय समझ तथा नैतिक जिम्मेदारी विकसित करती है। कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक होने के साथ–साथ उन्हें स्वस्थ एवं पर्यावरण–हितैषी जीवनशैली अपनाने हेतु प्रेरित करने वाली रही।

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