नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। दुनिया में बुद्ध को मानने वाले करोड़ों श्रद्धालु हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसी बुद्ध प्रतिमा भी है जो ठोस सोने से बनी है और करीब दो सदियों तक मिट्टी में दबी रही? यह अद्भुत मूर्ति न सिर्फ कला का उत्कृष्ट नमूना है, बल्कि इतिहास और आध्यात्मिकता का भी अनमोल प्रतीक मानी जाती है।
कहां स्थित है यह सोने की बुद्ध मूर्ति?
यह अद्वितीय मूर्ति थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में स्थित वाट ट्रैमिट मंदिर में स्थापित है।
इस मूर्ति को ‘गोल्डन बुद्ध (Golden Buddha)’ के नाम से जाना जाता है।
मूर्ति की ऊंचाई लगभग 3 मीटर (10 फीट) है।
इसका कुल वजन करीब 5,500 किलोग्राम (12,125 पाउंड) है।
यह दुनिया की सबसे बड़ी ठोस सोने की बुद्ध प्रतिमा मानी जाती है।
मूर्ति के निर्माण में लगभग 83% शुद्ध सोना इस्तेमाल हुआ है।
बुद्ध के शरीर का भाग 40% शुद्ध सोने से बना है।
जबकि बाल और चोटी 99% शुद्ध सोने से निर्मित हैं।
अगर मौजूदा सोने के अंतरराष्ट्रीय दाम के अनुसार कीमत आंकी जाए तो इस मूर्ति का मूल्य करीब 480 मिलियन अमेरिकी डॉलर (₹4,000 करोड़ से अधिक) बताया जाता है।
बुद्ध की मुद्रा और आध्यात्मिक प्रतीक
गोल्डन बुद्ध की यह प्रतिमा भूमिस्पर्श मुद्रा में विराजमान है — यह मुद्रा ज्ञान, वासना और अज्ञान पर विजय का प्रतीक है।
प्रतिमा का शांत और आभामय स्वरूप बौद्ध दर्शन की गहराई और जीवन में स्थिरता का संदेश देता है।
क्यों 200 सालों तक मिट्टी में छिपाई गई थी मूर्ति?
इतिहासकारों के अनुसार, इस मूर्ति को 18वीं सदी में प्लास्टर और मिट्टी की मोटी परत से ढक दिया गया था।
इसका कारण था —
आक्रमणों के समय इसे लूट से बचाना।
और इसके असली सोने के स्वरूप को गोपनीय रखना।
कई वर्षों तक किसी को भी पता नहीं था कि यह मूर्ति सोने की बनी है। 1955 में जब इसे एक नए मंदिर में स्थानांतरित किया जा रहा था, तभी परत का कुछ हिस्सा टूट गया और सोने की चमक सबके सामने आ गई। इसके बाद इसका वास्तविक स्वरूप दुनिया के सामने आया।
इतिहास, आस्था और अद्भुत खोज का संगम
गोल्डन बुद्ध की खोज ने इतिहासकारों और श्रद्धालुओं दोनों को चौंका दिया।
यह न केवल थाईलैंड की धार्मिक धरोहर है, बल्कि यह साबित करती है कि कला और आस्था समय की किसी भी परत के नीचे छिपी रहे, एक दिन जरूर उजागर होती है।
