भाटपार रानी, देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।
वर्तमान डबल इंजन की भाजपा सरकार पर स्थानीय जनता और विपक्ष के नेताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। भाटपार रानी तहसील क्षेत्र के विकास कार्यों में उपेक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और रेलवे ठहराव समाप्त होने जैसी समस्याओं से आमजन खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर सबसे अहम मुद्दा बनकटा रेलवे स्टेशन का है, जो कभी इस क्षेत्र की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक तरक्की का मुख्य केंद्र था। अब स्टेशन पर प्रमुख ट्रेनों का ठहराव बंद कर दिया गया है। मौर्य एक्सप्रेस और बरौनी–ग्वालियर ट्रेन के न रुकने से गरीब मरीजों और उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने वाले विद्यार्थियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

ट्यूबवेल योजना में भेदभाव का आरोप

क्षेत्र के कई अहम गांवों में सिंचाई की गंभीर समस्या बनी हुई है।

बनकटिया दुबे: सरकारी नलकूप है, लेकिन नाली मरम्मत के अभाव में उपयोग बाधित।

प्रताप छापर व भुड़वार: आज तक एक भी सरकारी स्टेट ट्यूबवेल नहीं लगाया गया।

सोहनपुर: ट्यूबवेल संख्या 69 खराब, सिंचाई कार्य ठप।

बंजरिया पाण्डेय: नलकूप की नाली जाम, किसानों को दिक्कत।

मिश्रौली व खोराबार: अब तक एक भी सरकारी ट्यूबवेल की स्थापना नहीं।

इसके विपरीत, कुछ गांवों जैसे इंगुरी सराय और जंजिरहा में नए नलकूप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जातिगत और राजनीतिक भेदभाव के कारण कई ब्राह्मण बहुल व मिश्रित गांवों को योजनाओं से वंचित रखा गया है।

स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति

बनकटा–भुड़वार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। क्षेत्रीय लोगो समाजिक लोगो द्वारा लगातार आवाज उठाए जाने के बाद हाल में चार डॉक्टरों की तैनाती की गई, मगर अब भी आधे से अधिक चिकित्सक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भेज दिए गए हैं।

जनता का आक्रोश, चुनाव में असर तय

स्थानीय जनता का कहना है कि “सबका साथ, सबका विकास” का नारा सिर्फ छलावा बनकर रह गया है। विकास कार्यों की अनदेखी, रेलवे ठहराव बंद होना और स्वास्थ्य–सिंचाई संकट से आमजन में नाराजगी गहराती जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो आगामी विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ दल को जनता की नाराजगी का भारी खामियाजा उठाना पड़ सकता है।

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