Thursday, January 15, 2026
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चार राज्य विश्वविद्यालयों के मध्य एमओयू: प्रदेश में उच्च शिक्षा सहयोग का नया अध्याय

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के गोरखनाथ शोध पीठ में उत्तर प्रदेश के चार राज्य विश्वविद्यालयों के मध्य मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह अवसर राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग, गुणवत्ता और नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। इस समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने की। कार्यक्रम उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस समझौते में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या, मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय मिर्जापुर और जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय चित्रकूट सम्मिलित हैं।
एमओयू के अंतर्गत विश्वविद्यालय संयुक्त शोध परियोजनाओं, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों का संचालन करेंगे। कला, साहित्य एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में परस्पर सहयोग स्थापित किया जाएगा। शिक्षक एवं शोधकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण तथा क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित होंगे। छात्र एवं प्राध्यापक विनिमय, इंटर्नशिप और संयुक्त शैक्षणिक पाठ्यक्रमों की व्यवस्था की जाएगी। कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक विज्ञान जैसे क्षेत्रों में संयुक्त शोध और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही संस्थागत स्तर पर दीर्घकालिक एवं सतत सहयोग स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने अपने संबोधन में कहा कि “यह समझौता केवल एक औपचारिक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि भविष्य के लिए साझा दृष्टि और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। हम राज्य स्तर पर शैक्षणिक उत्कृष्टता और शोध गुणवत्ता के नए मानक स्थापित करने हेतु संकल्पबद्ध हैं।”
यह हस्ताक्षर समारोह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 विषयक राष्ट्रीय कार्यशाला के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका संयुक्त आयोजन दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, वरिष्ठ शिक्षाविद, प्राध्यापकगण और छात्र प्रतिनिधि सम्मिलित हुए। उपस्थित जनों ने इस पहल को उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर करार दिया।

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