देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पारंपरिक शिल्प और माटीकला से जुड़े उद्यमों को बढ़ावा देने हेतु मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को अधिकतम ₹10 लाख तक का ऋण बैंकिंग संस्थानों के माध्यम से प्रदान किया जा रहा है, साथ ही पूंजीगत ऋण पर 25% तक का अनुदान (मार्जिन मनी) भी राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है। यह जानकारी जिला ग्रामोद्योग अधिकारी श्री वीरेंद्र प्रसाद ने दी। उन्होंने बताया कि योजना के तहत माटीकला से संबंधित विविध व्यवसायिक गतिविधियाँ जैसे—खिलौना निर्माण, घरेलू उपयोग की वस्तुएँ (कुल्हड़, सुराही, गिलास, अचारदानी आदि), भवन निर्माण सामग्री (टाइल्स, पाइप, वाशबेसिन) और सजावटी सामग्री (गुलदस्ता, बोनसाई पॉट्स, लैम्प्स आदि) के निर्माण के लिए व्यक्तिगत उत्पादन इकाइयों की स्थापना हेतु वित्तीय सहायता दी जा रही है।योजना की प्रमुख विशेषताएं: ऋण सीमा: अधिकतम ₹10 लाख तक अनुदान: परियोजना लागत पर 25% तक का अनुदान स्वयं अंशदान: कुल लागत का 5% लाभार्थी को स्वयं वहन करना होगा योग्यता- ₹5 लाख तक की परियोजना के लिए – उत्तर प्रदेश का मूल निवासी एवं न्यूनतम 18 वर्ष का साक्षर होना अनिवार्य ₹5 लाख से अधिक की परियोजना के लिए – कम से कम कक्षा 8 उत्तीर्ण एवं माटीकला का प्रशिक्षण या पारंपरिक अनुभव होना चाहिए। आवेदन प्रक्रिया:- योजना ऑनलाइन पोर्टल https://upmatikalaboard.in के माध्यम से संचालित है। आवेदन के उपरांत लाभार्थियों को पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, पैन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, शैक्षिक योग्यता प्रमाण पत्र एवं विस्तृत परियोजना रिपोर्ट आदि दस्तावेज अनिवार्य रूप से जिला ग्रामोद्योग कार्यालय, जिला पंचायत भवन (प्रथम तल), देवरिया में जमा करने होंगे। प्रसाद ने बताया कि इच्छुक व्यक्ति किसी भी कार्य दिवस में कार्यालय में संपर्क कर आवेदन प्रक्रिया एवं योजना से संबंधित अन्य जानकारियाँ प्राप्त कर सकते हैं। यह योजना न केवल परंपरागत शिल्प को पुनर्जीवित करने का कार्य करेगी, बल्कि प्रदेश के युवाओं को स्वावलंबन की दिशा में एक नई राह भी प्रदान करेगी।
