पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की कवायद बीते 19 वर्षों से लगातार जारी है, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है। कार्मिक विभाग के निर्देश पर राज्य के निगरानी विभाग द्वारा तैयार की गई ताजा रिपोर्ट ने एक बार फिर सरकारी व्यवस्था की पोल खोल दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, मुजफ्फरपुर जिला भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या के मामले में राज्य में शीर्ष स्थान पर है। यह तथ्य प्रदेश के लिए न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह भी सवाल खड़े करता है कि आखिर इतने वर्षों की सख्ती के बाद भी भ्रष्टाचार का यह दानव थमा क्यों नहीं? निगरानी विभाग की रिपोर्ट में क्या है खास?
वर्ष 2006 से 2025 तक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के मामलों में सबसे अधिक आरोपी मुजफ्फरपुर जिले से हैं। इन मामलों में दर्ज एफआईआर, गिरफ्तारी, ट्रैप केस और निलंबन की संख्या अन्य जिलों की तुलना में काफी अधिक है। सबसे अधिक भ्रष्टाचार के मामले राजस्व, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण, नगर विकास और शिक्षा विभाग से जुड़े हैं।
राज्य सरकार ने इस रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है। कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि: “भ्रष्ट अधिकारियों पर शिकंजा कसना हमारी प्राथमिकता है। रिपोर्ट के आधार पर कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।” भ्रष्टाचार के मामलों में टॉप 5 जिले: मुजफ्फरपुर, पटना, गया, दरभंगा और पूर्णिया। निगरानी विभाग द्वारा अब तक कुल 850 से अधिक केस दर्ज किए गए हैं जिनमें लगभग 2100 से अधिक सरकारी कर्मचारी आरोपी हैं। बिहार में भ्रष्टाचार से लड़ने की कोशिशें भले ही जारी हैं, लेकिन व्यवस्था के भीतर जमी जड़ें इसे मिटाने नहीं दे रही हैं। मुजफ्फरपुर जैसे प्रमुख शहर का नाम इस सूची में सबसे ऊपर आना चिंता का विषय है, जिसे अब केवल जांच से नहीं, बल्कि व्यवस्थित जवाबदेही और पारदर्शी प्रशासनिक सुधारों से ही नियंत्रित किया जा सकता है।