Tuesday, February 17, 2026
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भव्य किसान मेला व जनपद स्तरीय कृषि गोष्ठी का आयोजन

कृषकों को मिला नई कृषि तकनीकों व बीजों का लाभ, मक्का व मिलेट्स खेती पर जोर

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l देवरिया क्लब प्रांगण में त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम योजना एवं नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल सीड्स के अंतर्गत जनपद स्तरीय गोष्ठी एवं किसान मेला का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की।

शाही ने अपने संबोधन में किसानों को मक्का, तिलहन व श्रीअन्न (मिलेट्स) की खेती को अपनाने और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने किसानों को बीज मिनीकिट भी वितरित किए, जिससे वे आधुनिक व गुणवत्तापूर्ण बीजों का प्रयोग कर कृषि उत्पादन बढ़ा सकें।

कार्यक्रम में देश के जाने-माने कृषि वैज्ञानिकों डा. ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह, निदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा कृषि सुधारों व बीज संरक्षण पर जानकारी दी गई।डा. नागेन्द्र कुमार सिंह, प्रोफेसर, आईसीएआर, ने धान की नई प्रजातियों की जानकारी दी।

डा. कुलदीप त्रिपाठी ने दलहनी व तिलहनी फसलों की उन्नत विधियों पर विस्तृत व्याख्यान दिया।

डा. प्रशांत राय, निदेशक, बीज नैनी संस्थान, प्रयागराज ने गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन की प्रक्रिया समझाई।

प्रोफेसर वैदूर्य प्रताप शाही ने नई कृषि तकनीकों पर विस्तृत चर्चा की।

डा. मान्धाता सिंह, प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र, मल्हना ने मोटे अनाज और प्राकृतिक खेती की महत्ता बताई।

उप कृषि निदेशक देवरिया सुभाष मौर्य ने उपस्थित कृषकों को कृषि विभाग की योजनाओं और सहायता कार्यक्रमों की जानकारी दी और मिलेट्स, मक्का, दलहन व तिलहन की खेती के लाभों को विस्तार से समझाया।

गोष्ठी में जनप्रतिनिधियों और कृषि विभाग के अधिकारियों की भी भागीदारी रही, जिनमें शामिल थे:

अन्तर्यामी सिंह (पूर्व जिलाध्यक्ष, भाजपा)

प्रमोद शाही (जिला महामंत्री, भाजपा)

पवन मिश्र (जिलाध्यक्ष, किसान मोर्चा)

अलका सिंह (अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद)

उदयशंकर सिंह (ब्लॉक प्रमुख, तरकुलवा)

संतोष कुमार मौर्य (जिला कृषि अधिकारी)

धीरेन्द्र प्रताप सिंह (विषय वस्तु विशेषज्ञ)

दिग्विजय नाथ सिंह (कृषि सलाहकार)

कार्यक्रम में देवरिया जनपद के सभी विकासखंडों से आए सैकड़ों किसानों ने भाग लिया और कृषि क्षेत्र में हो रहे नवाचारों का लाभ उठाया।

यह आयोजन किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और नवीनतम कृषि तकनीकों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

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