महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। फरेंदा विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मथुरा नगर में कचरा प्रबंधन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत करीब एक वर्ष पूर्व 30 लाख रुपये से अधिक की लागत से बनाए गए कूड़ा डंपिंग यार्ड व रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) पर प्रशासनिक उदासीनता के चलते आज तक ताला लटका हुआ है। लाखों रुपये की लागत से बना यह सेंटर उपयोग के अभाव में बेमतलब साबित हो रहा है।
आरआरसी सेंटर का उद्देश्य गांव के कचरे को एकत्र कर उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना था, लेकिन सेंटर बंद होने के कारण कचरा यार्ड में डालने के बजाय सड़कों के किनारे फेंका जा रहा है। इससे पूरे गांव में गंदगी फैल गई है और दुर्गंध के कारण लोगों का जीना मुहाल हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सेंटर का निर्माण होने के बाद आज तक उसमें एक बार भी कूड़ा नहीं डाला गया। मुख्य गेट पर हमेशा ताला बंद रहता है, जिससे ग्रामीण कचरा जमा नहीं कर पाते। मजबूरी में लोग खुले स्थानों और सड़कों के किनारे कचरा फेंक रहे हैं।ग्रामीण राजेश, मुकेश, सर्वजीत, बुधिराम, चंद्रभान, अरविंद, रामनेवास और हरवंश ने आरोप लगाया कि यार्ड के संचालन के लिए जिम्मेदार अधिकारी मूक दर्शक बने हुए हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
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आरआरसी सेंटर के बंद रहने से न केवल स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हुई है, बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। जबकि केंद्र व राज्य सरकार की स्वच्छता अभियान को बड़े पैमाने पर चलतीं हैं, और उसी योजनाओं को ठेंगा दिखाकर जिम्मेदार मलाई काट रहे हैं। निर्माण होने के बाद जिम्मेदार कमीशन लेकर डकार गए और (आरआरसी) सेंटर बेमतलब साबित हो रहा हैं।
इस संबंध में फरेंदा खंड विकास अधिकारी अतुल कुमार ने बताया कि आरआरसी सेंटर के बंद होने की जानकारी मिली है। मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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