राजापाकड़। कुशीनगर(राष्ट्र की परम्परा)तमकुही विकास खंड के ग्राम पंचायत बरवा राजापाकड़ के टोला सपही बरवा में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के आठवें दिन गुरुवार की रात्रि कथावाचक आचार्य पं. विनय पांडेय ने श्रोताओं को सुदामा चरित्र प्रसंग का वर्णन सुनाया। उन्होंने कहा कि गुरु आश्रम में सुदामा ने चना चुरा कर नहीं खाये, बल्कि इसलिए खाये की चने शापित थे और जो खाता वह दरिद्र हो जाता। त्रिकालदर्शी सुदामा ने सोचा यदि कृष्ण चना खायेगा तो पूरा त्रैलोक्य दरिद्र हो जायेगा। सुदामा ने मित्र धर्म का परिचय दिया। सुदामा भगवान के अनन्य भक्त थे, भगवान से भक्त चोरी कैसे करेगा जो हर जगह भगवान को ही देखता है। उन्होंने कहा कि संयम, सादगी, और संतुष्टि के साथ पूर्ण विश्वास के साथ भक्ति करने से परमात्मा अपने बराबर में बैठाते है। सुदामा और कृष्ण की मित्रता त्याग और बलिदान का प्रमाण है। एक चने खाकर व एक चावल खाकर एक दूसरे को गरीब और दरिद्र होने से बचाते हुए त्रैलोक्य की सम्पदा प्रदान करते हैं। जीवन में सच्चे मित्र का हाथ और साथ है तो जिंदगी स्वर्ग से कम नहीं होती। इस अवसर पर यजमान कमलावती देवी, सुकदेव गुप्ता, सिंहासन गुप्ता, अच्युता नंद पांडेय, हरिप्रसाद जी, शंकर गुप्ता, छठ्ठू गुप्ता, अरविंद, ध्रुव देव, गुप्ता, प्रदीप पांडेय, अभिषेक तिवारी, राधेश्याम गुप्ता, राघव गुप्ता, चंदा देवी, लीलावती देवी, सुनरपति देवी, ज्योता देवी, मुन्नी, रम्भा, आरती, रंजना, वंदना, गुड़िया, मीरा, अमृता, विनीता, निशा, चिंता आदि उपस्थित रहे।
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