शराब, सिगरेट और हुक्का युवाओं की हड्डियों को कर रहे कमजोर, जानिए कैसे बचाएं अपनी सेहत
डॉ वाचस्पति शुक्ला (एम. डी.) होमियोपैथी
खराब जीवनशैली से बढ़ रहा ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा, कैल्शियम-विटामिन डी और नियमित व्यायाम से हड्डियों को बनाएं मजबूत
शराब, सिगरेट और हुक्के का बढ़ता चलन युवाओं की सेहत के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। इनके सेवन से फेफड़ों और लिवर पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की चर्चा तो अक्सर होती है, लेकिन हड्डियों पर पड़ने वाले नुकसान को लोग नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञ के अनुसार, धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन, पौष्टिक आहार की कमी और शारीरिक गतिविधियों का अभाव हड्डियों की मजबूती को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्या को केवल बुजुर्गों की बीमारी मानना सही नहीं है। हड्डियां शरीर का मजबूत आधार हैं। ये शरीर को आकार देने के साथ-साथ चलने-फिरने, खड़े रहने और आंतरिक अंगों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का घनत्व स्वाभाविक रूप से कम हो सकता है, लेकिन गलत आदतें इस प्रक्रिया को तेज कर सकती हैं। ऐसे में समय रहते जीवनशैली में बदलाव करना और हड्डियों की सेहत पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। क्या है ऑस्टियोपोरोसिस और क्यों खतरनाक है यह बीमारी? ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों से जुड़ी ऐसी स्थिति है, जिसमें उनका घनत्व और मजबूती कम होने लगती है। इससे हड्डियां कमजोर और नाजुक हो जाती हैं तथा मामूली चोट या गिरने पर भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। इस बीमारी को अक्सर ‘साइलेंट डिजीज’ कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती दौर में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कई लोगों को तब तक समस्या का पता नहीं चलता, जब तक किसी छोटी-सी चोट से हड्डी में फ्रैक्चर न हो जाए। रीढ़ की हड्डियों में कमजोरी आने पर पीठ दर्द, कद में कमी और झुकाव जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। हालांकि, हर प्रकार का कमर या पीठ दर्द ऑस्टियोपोरोसिस का संकेत नहीं होता। लगातार दर्द या बार-बार फ्रैक्चर होने पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। शराब, सिगरेट और हुक्का कैसे कमजोर करते हैं हड्डियां?
शराब का अत्यधिक सेवन: लंबे समय तक अधिक मात्रा में शराब पीने से शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी के संतुलन, पोषण तथा हड्डियों के निर्माण की प्रक्रिया पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इससे हड्डियों का घनत्व घटने और गिरने या फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है।
सिगरेट और तंबाकू: धूम्रपान हड्डियों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे हड्डियों के निर्माण और उनकी मरम्मत की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। धूम्रपान करने वालों में फ्रैक्चर होने पर हड्डी जुड़ने में भी अधिक समय लग सकता है।
हुक्का भी नहीं है सुरक्षित: कई युवा हुक्के को सिगरेट से कम नुकसानदेह मानते हैं, जबकि हुक्के के धुएं में भी निकोटीन, कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य हानिकारक पदार्थ हो सकते हैं। इसका सेवन भी स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा करता है। फ्लेवर्ड हुक्का या कम अंतराल पर इसका इस्तेमाल करना इसे सुरक्षित नहीं बनाता।
शारीरिक गतिविधियों की कमी: लंबे समय तक बैठे रहना, व्यायाम से दूरी बनाना और धूप में बिल्कुल न निकलना भी हड्डियों की सेहत पर असर डाल सकता है। वजन सहन करने वाले व्यायाम और नियमित शारीरिक गतिविधियां हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में सहायक होती हैं। हड्डियों का घनत्व घटने के प्रमुख कारण हड्डियों की कमजोरी के पीछे केवल उम्र ही जिम्मेदार नहीं होती। कई दैनिक आदतें और शारीरिक स्थितियां भी इसके जोखिम को बढ़ा सकती हैं। कैल्शियम और विटामिन डी की कमी। भोजन में प्रोटीन तथा अन्य जरूरी पोषक तत्वों का अभाव। धूम्रपान, तंबाकू और अत्यधिक शराब का सेवन। लंबे समय तक शारीरिक निष्क्रियता। कम वजन या कुपोषण। महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होना। परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस या हड्डी टूटने का इतिहास। कुछ बीमारियां और लंबे समय तक स्टेरॉयड जैसी दवाओं का इस्तेमाल। उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का घनत्व कम होने की आशंका बढ़ती है, लेकिन किसी व्यक्ति में यह समस्या कब विकसित होगी, यह उसकी जीवनशैली, आनुवंशिकता, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी अन्य कारकों पर निर्भर करता है। महिलाओं में मेनोपॉज के बाद क्यों बढ़ जाता है खतरा? महिलाओं में मेनोपॉज यानी मासिक धर्म स्थायी रूप से बंद होने के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है। यह हार्मोन हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके स्तर में गिरावट के कारण हड्डियों का घनत्व तेजी से कम हो सकता है। जल्दी मेनोपॉज होना, अंडाशय को शल्य चिकित्सा से हटाना, कम वजन और परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास जोखिम बढ़ा सकते हैं। ऐसी महिलाओं को अपनी हड्डियों की सेहत के प्रति विशेष रूप से सजग रहना चाहिए। जरूरत के अनुसार डॉक्टर बोन डेंसिटी टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए क्या करें?
कैल्शियम से भरपूर आहार लें: दूध, दही, पनीर, रागी, तिल, कुछ हरी पत्तेदार सब्जियां और कैल्शियम से भरपूर अन्य खाद्य पदार्थों को अपने भोजन में शामिल करें। शरीर की जरूरत उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
विटामिन डी का ध्यान रखें: विटामिन डी शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। सुरक्षित तरीके से धूप लेना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह से जांच कराना उपयोगी हो सकता है।
नियमित व्यायाम करें: तेज चाल से पैदल चलना, सीढ़ियां चढ़ना और अपनी क्षमता के अनुसार शक्ति बढ़ाने वाले व्यायाम हड्डियों और मांसपेशियों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। उम्रदराज लोगों को संतुलन सुधारने वाले व्यायाम भी करने चाहिए, ताकि गिरने का जोखिम कम हो।
नशे से दूरी बनाएं: सिगरेट, हुक्का और तंबाकू छोड़ना तथा शराब से परहेज करना हड्डियों सहित संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। नशे की आदत छोड़ने में कठिनाई होने पर चिकित्सकीय सहायता ली जा सकती है।
संतुलित भोजन करें: दाल, दूध, दही, अंडे या अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोतों, फल, सब्जियों और साबुत अनाज को भोजन का हिस्सा बनाएं। बहुत कम भोजन करना या बिना विशेषज्ञ की सलाह के कठोर डाइट अपनाना नुकसानदेह हो सकता है।
पर्याप्त नींद लें: नियमित दिनचर्या और पर्याप्त नींद समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करती है। देर रात तक जागने की आदत के साथ यदि खान-पान और व्यायाम भी बिगड़ जाएं, तो स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
गिरने से बचाव करें: घर में पर्याप्त रोशनी रखें, फिसलन वाले फर्श से बचें और जरूरत पड़ने पर सहारा लेकर चलें। हड्डियां कमजोर होने की स्थिति में गिरने से बचना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। कब कराना चाहिए बोन डेंसिटी टेस्ट? बोन डेंसिटी टेस्ट को डेक्सा (DEXA या DXA) स्कैन भी कहा जाता है। इसके जरिए हड्डियों के खनिज घनत्व को मापा जाता है। यह विशेष रूप से कूल्हे और रीढ़ की हड्डियों की जांच में उपयोगी है। डॉक्टर उम्र, मेनोपॉज, पहले हुए फ्रैक्चर, पारिवारिक इतिहास, दवाओं और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर यह जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। यदि मामूली चोट से हड्डी टूट जाए, कद कम होने लगे या लगातार पीठ दर्द बना रहे, तो चिकित्सकीय सलाह लें। केवल लक्षणों के आधार पर खुद से ऑस्टियोपोरोसिस का निष्कर्ष न निकालें। विशेषज्ञ की सलाह डॉ. वाचस्पति शुक्ला, एम.डी. (होम्योपैथी), के अनुसार, हड्डियों के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता जरूरी है। लोगों को हड्डियों में दर्द या कमजोरी को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और नशे से दूरी हड्डियों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जरूरत पड़ने पर उचित जांच और विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। ध्यान रहे कि ऑस्टियोपोरोसिस की पहचान और उपचार के लिए वैज्ञानिक रूप से मान्य चिकित्सकीय जांच तथा आवश्यकतानुसार उपचार जरूरी है। केवल होम्योपैथिक या किसी अन्य वैकल्पिक उपचार पर निर्भर रहना हड्डियों के घनत्व में कमी को रोकने या ठीक करने का प्रमाणित विकल्प नहीं है। निष्कर्ष: आज की अच्छी आदतें, कल की मजबूत हड्डियां हड्डियों की मजबूती केवल बुढ़ापे में ध्यान देने का विषय नहीं है। बचपन और युवावस्था से ही अच्छा पोषण, नियमित शारीरिक गतिविधि और नशे से दूरी अपनाना भविष्य में हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। शराब, सिगरेट और हुक्के को शौक समझकर अपनाने वाले युवाओं को यह समझना होगा कि इनका नुकसान धीरे-धीरे शरीर पर दिखाई दे सकता है। मजबूत हड्डियों का मंत्र है—संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, नशे से दूरी और समय पर चिकित्सकीय जांच।