गोरखपुर में विजयादशमी पर दिखा गंगा-जमुनी तहजीब का अद्भुत संगम! योगी की शोभायात्रा पर बरसे फूल, मुस्लिम-बुनकर और सिंधी समाज ने किया भव्य स्वागत

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। गोरक्षनगरी में विजयादशमी का पर्व आस्था, परंपरा और सामाजिक सौहार्द के अनूठे संगम का साक्षी बना। गोरखनाथ मंदिर से निकली गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पारंपरिक शोभायात्रा में जहां नाथपंथ की प्राचीन परंपराओं की झलक दिखाई दी, वहीं मुस्लिम, बुनकर और सिंधी समाज के लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत कर गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की। जगह-जगह पुष्पवर्षा और माल्यार्पण के बीच शोभायात्रा आगे बढ़ी तो पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा। इस आयोजन ने धार्मिक आस्था के साथ आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता का भी संदेश दिया।
गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुरूप मंगलवार शाम करीब साढ़े चार बजे गोरखनाथ मंदिर से विजयादशमी शोभायात्रा निकाली गई। इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का विधिवत पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद महंत के पारंपरिक परिधान में फूलों से सजे विशेष वाहन पर सवार होकर उन्होंने शोभायात्रा की अगुवाई की।
शोभायात्रा में नाथपंथ के पारंपरिक वाद्ययंत्र नागफनी, तुरही, नगाड़े और डमरू की गूंज ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। बैंड-बाजे की धुन और श्रद्धालुओं के उत्साह के बीच आगे बढ़ती शोभायात्रा गोरक्षपीठ की ऐतिहासिक परंपरा का जीवंत प्रदर्शन करती नजर आई। मार्ग में श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और धार्मिक उत्साह के साथ पर्व की खुशियां साझा कीं।
इस आयोजन का सबसे खास पहलू विभिन्न समुदायों की सहभागिता रही। मुस्लिम, बुनकर और सिंधी समाज के लोगों ने शोभायात्रा का उत्साहपूर्वक अभिनंदन किया। गोरक्षपीठाधीश्वर ने लोगों का अभिवादन स्वीकार किया, उन्हें आशीर्वाद दिया और नवरात्र अनुष्ठान का प्रसाद वितरित किया। इस दृश्य ने धार्मिक आयोजन को सामाजिक सद्भाव के व्यापक संदेश से जोड़ दिया।
परंपरागत विजयादशमी यात्रा अपने अगले पड़ाव मानसरोवर पहुंची, जहां महादेव की आराधना की गई। इसके बाद रामलीला मैदान में विजयादशमी उत्सव की धार्मिक परंपरा पूरी हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रभु श्रीराम का राजतिलक किया और भगवान श्रीराम, माता जानकी, लक्ष्मण तथा हनुमानजी का पूजन-अर्चन कर आरती उतारी। इस दौरान श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता की।
मुख्यमंत्री ने रामलीला मैदान के बाहर स्थापित भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन भी किया। इस तरह गुरु गोरखनाथ के पूजन से शुरू हुआ विजयादशमी का पारंपरिक आयोजन महादेव की आराधना और प्रभु श्रीराम के राजतिलक के साथ संपन्न हुआ।
गोरखपुर की इस विजयादशमी ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज को जोड़ने, आपसी विश्वास मजबूत करने और साझा सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर भी होते हैं। गोरखनाथ मंदिर की परंपरा, प्रभु श्रीराम के आदर्श और विभिन्न समुदायों की सहभागिता ने गोरक्षनगरी के इस आयोजन को खास बना दिया।