Wednesday, February 4, 2026
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माटी कला स्वरोजगार और जीविकोपार्जन का बेहतर संसाधन

कुम्हारी कला को आधुनिकतम स्वरूप दिए जाने की आवश्यकता .डॉ हरेंद्र प्रजापति

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)मंडलीय ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केंद्र ,धर्मागतपुर, रतनपुरा, के परिसर में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माटी कला बोर्ड के पूर्व सदस्य डॉक्टर हरेंद्र कुमार प्रजापति ने कहा कि कुम्हारी कला को आधुनिकतम स्वरूप दिए जाने की आवश्यकता है। क्योंकि परंपरागत पुरातन चाक के स्थान पर इलेक्ट्रिक चाक अपनी पहचान बनाते हुए पूरी तरह से माटी कला में स्थापित हो चुका है, जिससे माटी कला से जुड़े लोग कुल्हड़, मटका, इत्यादि बनाकर बेहतर ढंग से जीविकोपार्जन कर सकते है, तथा स्वावलंबन की दिशा मे अपना बेहतर कैरियर और भविष्य संवार करके अग्रसर हो सकते है।

माटी कला बोर्ड के पूर्व सदस्य डॉक्टर हरेंद्र कुमार प्रजापति ने कहा कि पहले लोग 200 कुल्हड़ तैयार करके अपना जीविकोपार्जन करते थे, परंतु आज स्थिति ऐसी है की माटी कला की वस्तुएं दिल्ली के बाजार एवं रेस्टोरेंट तथा अन्य स्थानों पर अपनी बेहतर उपस्थिति दर्ज करा रही है। वहीं सऊदी अरब, लंदन और न्यूयॉर्क जैसे विदेशों में इसकी मांग बढ़ रही है। इसलिए प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद आप लोग माटी कला की वस्तुएं बनाकर बेहतर भविष्य का निर्माण करें। और स्वावलंबी बने, तथा बच्चों का बेहतर भविष्य बनावें।

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कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि फतेह बहादुर गुप्त ने अपने संबोधन में कहा कि आने वाला दिन माटी कला की वस्तुओं का है ,और इसका बहुत बड़ा भविष्य और बाजार है। रेलवे में कुल्हड़ का बहुतायत प्रयोग करने के लिए तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद ने विभाग को आदेशित किया था, तब से बाजार में कुल्हड़ की मांग बढ़ी हुई है। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्र के प्रधानाचार्य अभय कुमार द्विवेदी तथा संचालन बब्बन जी ने किया। अन्य वक्ताओं में शैलेंद्र सिंह, महेंद्र प्रजापति, मिथिलेश यादव ने भी प्रशिक्षणार्थियों का मार्गदर्शन किया।

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