बारिश ने बिगाड़ा कोयले का गणित, देश के 57 बिजलीघर संकट में; अब बढ़ाई गई सप्लाई

थर्मल पावर प्लांटों में कोयले का संकट, 57 बिजलीघर क्रिटिकल स्टॉक में; झारखंड की बारिश ने बढ़ाई चिंता


नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। झारखंड और आसपास के प्रमुख कोयला उत्पादक इलाकों में अगस्त के दौरान हुई लगातार बारिश का असर अब देश के थर्मल पावर प्लांटों पर दिखाई देने लगा है। बारिश के कारण कोयला खदानों में उत्पादन के साथ-साथ उसकी ढुलाई भी प्रभावित हुई, जिससे कई बिजलीघरों में कोयले का भंडार तेजी से घट गया है। कुछ बिजलीघरों के पास महज चार से पांच दिन का स्टॉक बचा है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के 4 सितंबर के आंकड़ों के मुताबिक देश के 57 कोयला आधारित बिजलीघर क्रिटिकल स्टॉक की श्रेणी में पहुंच गए हैं। इन बिजलीघरों में करीब 27.1 मिलियन टन कोयला उपलब्ध है, जबकि सामान्य संचालन के लिए लगभग 57.7 मिलियन टन कोयले की जरूरत होती है। इस तरह उपलब्ध स्टॉक सामान्य आवश्यकता का करीब 47 प्रतिशत ही रह गया है।
बारिश से उत्पादन और ढुलाई पर पड़ा असर
कोयला क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक साल की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च के बीच बिजलीघरों में पर्याप्त कोयला मौजूद था। पर्याप्त स्टॉक के कारण कई बिजलीघरों ने उस अवधि में कोयले की खरीद और उठाव कम कर दिया था।
इसके बाद कई राज्यों में बारिश अपेक्षाकृत कम होने से घरेलू, औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों में बिजली की मांग बढ़ी। मांग बढ़ने के साथ थर्मल पावर प्लांटों को कोयले की जरूरत भी बढ़ गई। इसी बीच मानसून की सक्रियता ने कोयला उत्पादन और परिवहन की रफ्तार को प्रभावित कर दिया।
लगातार बारिश से खदानों में कोयला सीम गीली हो जाती हैं। निचले इलाकों की कुछ खदानों में पानी भरने से खनन कार्य प्रभावित होता है। इसके अलावा खदानों के भीतर बनी सड़कों पर जलभराव और कीचड़ के कारण कोयले की ढुलाई भी धीमी पड़ जाती है।
बिजलीघरों को बढ़ाई जा रही कोयले की आपूर्ति
स्थिति को देखते हुए केंद्रीय स्तर पर कोयला कंपनियों को बिजलीघरों तक अधिक से अधिक कोयला पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। सितंबर की शुरुआत में बारिश कमजोर पड़ने के बाद उत्पादन और डिस्पैच में सुधार के संकेत मिले हैं।
फिलहाल बिजलीघरों को प्रतिदिन करीब 1.7 मिलियन टन कोयला भेजा जा रहा है। इससे पहले रोजाना आपूर्ति लगभग 1.2 से 1.4 मिलियन टन के बीच थी।
घटते स्टॉक को देखते हुए कोल इंडिया लिमिटेड ने फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट (FSA) वाले बिजलीघरों को वार्षिक अनुबंध में निर्धारित मात्रा से अधिक कोयला उठाने की अनुमति देने की पहल की है। इसका मकसद उन बिजलीघरों में स्टॉक बढ़ाना है, जहां कोयले की कमी के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित होने का खतरा है।
राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बिजलीघरों पर भी दबाव
क्षेत्रवार स्थिति में उत्तरी भारत के कई बिजलीघरों में कोयले का संकट अधिक गंभीर दिखाई दे रहा है। सीईए के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान के सभी सात थर्मल पावर प्लांट क्रिटिकल स्टॉक की स्थिति में थे। इन बिजलीघरों को नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) से कोयला मिलता है।
उत्तर प्रदेश के भी सात बिजलीघर कम स्टॉक की स्थिति से जूझ रहे हैं। इनमें चार बिजलीघरों को झारखंड की कोयला कंपनियों से आपूर्ति प्राप्त होती है।
पंजाब में भी स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। राज्य के निजी क्षेत्र के राजपुरा और तलवंडी साबो थर्मल पावर प्लांट में करीब पांच से छह दिनों का कोयला स्टॉक बताया गया है। दोनों संयंत्रों की संयुक्त उत्पादन क्षमता लगभग 3,380 मेगावाट है।
सीसीएल ने बढ़ाई रैक की संख्या
सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के सीएमडी निलेंदु कुमार सिंह के मुताबिक 25 अगस्त से 2 सितंबर के बीच झारखंड में हुई भारी बारिश के कारण कोयला उत्पादन और ढुलाई पर असर पड़ा। इस दौरान बिजलीघरों के लिए करीब 25 रैक ही भेजे जा पा रहे थे।
अब आपूर्ति की स्थिति में सुधार हुआ है और करीब 40 रैक प्रतिदिन भेजे जा रहे हैं। इसे बढ़ाकर 46 रैक तक करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि मानसून के दौरान कोयला कंपनियां आमतौर पर अधिक मात्रा में स्टॉक रखने से बचती हैं। ऐसे में यदि बारिश के कारण कुछ दिनों के लिए आपूर्ति बाधित होती है तो बिजलीघरों का उपलब्ध भंडार तेजी से कम होने लगता है।
25 प्रतिशत से कम स्टॉक पर ‘क्रिटिकल’ श्रेणी
सीईए के निर्धारित मानकों के अनुसार यदि किसी थर्मल पावर प्लांट में उसकी सामान्य आवश्यकता के 25 प्रतिशत से कम कोयला उपलब्ध रह जाता है, तो उसे क्रिटिकल स्टॉक श्रेणी में रखा जाता है।
4 सितंबर को क्रिटिकल श्रेणी में शामिल 57 बिजलीघरों में 52 घरेलू कोयले, चार आयातित कोयले और एक वॉशरी रिजेक्ट कोयले पर आधारित था।
झारखंड से कोयला पाने वाले प्रमुख क्रिटिकल बिजलीघर
महात्मा गांधी विद्युत संयंत्र, हरियाणा — CCL
हरदुआगंज टीपीएस, उत्तर प्रदेश — BCCL और CCL
जवाहरपुर एसटीपीएस, उत्तर प्रदेश — BCCL और CCL
टांडा टीपीएस, उत्तर प्रदेश — CCL
पनकी टीपीएस, उत्तर प्रदेश — CCL
नबीनगर पावर प्लांट, बिहार — CCL
पतरातू एसटीपीएस, झारखंड — CCL
आंकड़ों में कोयला संकट
क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट: 57
घरेलू कोयले पर आधारित: 52
आयातित कोयले पर आधारित: 4
वॉशरी रिजेक्ट आधारित: 1
उपलब्ध कोयला: 27.1 मिलियन टन
सामान्य आवश्यकता: 57.7 मिलियन टन
उपलब्धता: करीब 47 प्रतिशत
अनुमानित कमी: करीब 30.6 मिलियन टन
हालांकि सितंबर की शुरुआत में बारिश कमजोर होने और कोयला डिस्पैच बढ़ने से स्थिति में सुधार की उम्मीद है, लेकिन मौजूदा कम स्टॉक के कारण बिजली उत्पादन व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। आने वाले दिनों में कोयले की आपूर्ति कितनी तेजी से सामान्य होती है, यह तय करेगा कि थर्मल पावर प्लांटों पर बना संकट कितनी जल्दी कम होता है।

Editor CP pandey

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