पहलवान से संत बने ज्ञान गिरी, 35 साल से कर रहे शिव आराधना

परिवार का मोह त्याग बने संत: पहलवानी और खेती छोड़ 35 वर्षों से शिव भक्ति में लीन हैं ज्ञान गिरी महाराज

संवाददाता : भगवान्त यादव, कुशीनगर


कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जीवन में संघर्ष और जिम्मेदारियां हर व्यक्ति के हिस्से आती हैं, लेकिन कुछ लोग सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर अध्यात्म का मार्ग चुन लेते हैं। ऐसा ही प्रेरणादायक उदाहरण कुशीनगर जिले के कसया तहसील क्षेत्र स्थित टेकुआटार गांव में देखने को मिलता है, जहां भगवान शिव और हनुमान जी के प्राचीन मंदिर में वर्षों से सेवा कर रहे संत ज्ञान गिरी महाराज श्रद्धालुओं के बीच आस्था का केंद्र बने हुए हैं।
ज्ञान गिरी महाराज ने बताया कि उनका पूर्व नाम रामजीत था। युवावस्था में वह पहलवानी और खेती-किसानी से जुड़े रहे, लेकिन गुरु विभूति गिरी जी के सानिध्य और आशीर्वाद ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। करीब 35 वर्ष पहले उन्होंने परिवार, पत्नी, पुत्र, बहू, पौत्र-पौत्री सहित सांसारिक मोह-माया का त्याग कर संत जीवन अपना लिया। गुरु ने ही उनका नाम बदलकर ज्ञान गिरी रखा।
उन्होंने कहा कि माता-पिता के संस्कार और भगवान शिव की कृपा से उन्हें अध्यात्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली। आज वह टेकुआटार स्थित प्राचीन मंदिर में पुजारी के रूप में सेवा कर रहे हैं। मंदिर में दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं और आस्था के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।
मंदिर परिसर में वर्षों पुराना समाधि स्थल भी मौजूद है, जिसे स्थानीय लोग श्रद्धा के साथ देखते हैं। हर वर्ष यहां संत-सन्यासियों का समागम, भजन-कीर्तन और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि ज्ञान गिरी महाराज का जीवन त्याग, तपस्या और भक्ति की मिसाल है। उनका सादा जीवन और आध्यात्मिक विचार लोगों को धर्म और मानवता की राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

Editor CP pandey

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